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शनिवार, 5 मार्च 2011

एय मेरी जिन्दगी यूँ मुझसे दगा..

(१) एय मेरी जिन्दगी यूँ मुझसे दगा ना कर !
उसे भुला कर जिन्दा रहू दुआ ना कर !!
कोई उसे देखता हैं तो होती हैं तकलीफ !
एय हवा तू भी उसे छुवा ना कर .... !!


(२) उनकी तस्वीर को सिने से लगा लेते हैं !
इस तरह जुदाई का गम मिटा देते हैं !!
किसी तरह कभी उनका जिक्र हो जाये तो !
भींगी पलकों को हम झुका लेते हैं !!


(३) दोस्त कह कर दोस्त से दगा कर बैठा !
वो आज एक ऐसा खता कर बैठा !!
कहता था तुझे कभी हम खपा ना होने देगे !
आज वो खुद ही हमें खपा कर बैठा !!
आदत थी उसे सबोके गमो को दूर करने की लेकिन !
हमारे लिए ही वो गमो की दुआ कर बैठा !!


(४) हर बार मुझे जख्म ए दिल ना दिया कर !
तू मेरी नहीं तो मुझे दिखाई ना दिया कर !!
सच-झूठ तेरी आँखों से हो जाता हैं जाहिर !
क़समें ना खा, इतनी सफाई ना दिया कर !!


(५) उनका हाल भी कुछ आप जैसा ही होगा !
आपका हाले दिल उन्हें भी महसूस होगा !!
बेकरारी के आग में जो जल रहे हैं आप !
आपसे ज्यादा उन्हें इस जलन का एहसास होगा !!

आंसू से पलके भींगा लेता था...

(१) आंसू से पलके भींगा लेता था !
याद तेरी आती थी तो रो लेता था !!
सोचा था की भुला दूँ तुझको मगर !
हर बार ये फैसला बदल लेता था !!


(2) हर वक्त मुस्कुराना फिदरत हैं हमारी !
आप यूँ ही खुश रहे हसरत हैं हमारी !!
आपको हम याद आये या ना आये !
आपको याद करना आदत हैं हमारी !!


(3) हम वो नहीं की भूल जाया करते हैं !
हम वो नहीं जो निभाया करते हैं !!
दूर रहकर मिलना सायद मुस्किल हो !
पर याद करके सांसो में बस जाया करते हैं !!


(4) रात गुमसुम हैं मगर चाँद खामोश नहीं !
कैसे कह दूँ फिर आज मुझे होश नहीं !!
ऐसे डूबा तेरी आँखों के गहराई में आज !
हाथ में जाम हैं,मगर पिने का होश नहीं !!


(5) दिन तेरे ख़याल में गुजर जाता हैं !
रातों को भी ख़याल तेरा ही आता हैं !!
कभी ये ख़याल इस तरह बढ़ जाता है की !
आयने में भी तेरा ही चेहरा नज़र आता हैं !!