गुरुवार, 10 मार्च 2011

पैरंट्स ने बच्चों के लिए की मर्सी किलिंग की मांग

दुनिया में माताएं अपने बच्चों के लिए लंबी उम्र की दुआ मांगती हैं, लेकिन बिहार की आशा देवी के साथ ऐसा नहीं है। आशा के दो बेटे नितिन (15) और अंशु (11) मस्क्युलर डिस्ट्रफी नाम की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित हैं। दोनों बात नहीं कर सकते हैं और अपने पैरों पर नहीं चल सकते। वे छाती से नीचे लकवे का शिकार हैं। आशा कहती हैं कि यह नियति की क्रूरता ही है कि मैं अपने दोनों बच्चों के लिए मौत मांग रही हूं। नितिन और अंशु के पिता ने सरकार से उनके लिए दयामृत्यु की मांग की है। मस्क्युलर डिस्ट्रफी में मसल सेल्स और टिशू की डेथ के कारण मांसपेशियां खराब हो जाती हैं। इससे पीड़ित शख्स कंकाल का ढांचा बनकर रह जाता है। रीढ़ टेढ़ी हो जाती है और सांस लेना मुश्किल होने लगता है। आशा ने कहा कि दोनों बच्चे जब पैदा हुए तो स्वस्थ थे, लेकिन जब वे दो साल के हुए तो धीरे-धीरे उनकी हालत बिगड़ने लगी। मस्क्युलर डिस्ट्रफी ठीक होने वाली बीमारी नहीं है। इसके इलाज की दिशा में कुछ तरक्की हुई है, लेकिन यह इलाज सिर्फ अमेरिका में उपलब्ध है और इस पर 30 लाख रुपये से ज्यादा खर्च आता है। दोनों लड़कों के पिता बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में रतवादा गांव के गरीब किसान मुकेश कुमार इतनी बड़ी रकम का इंतजाम करने में असमर्थ हैं। उन्होंने कहा कि मैंने राज्य सरकार से दोनों बच्चों के दयामृत्यु की इजाजत देने की मांग की है। दोनों बच्चों के माता-पिता का कहना कि सरकार या तो उनके इलाज का इंतजाम करे या उनके लिए दयामृत्यु की इजाजत दे|

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