गुरुवार, 3 मार्च 2011

शिव के पौराणिक शिवालय....

यूँ तो प्रत्येक शहर और गाँवों में शिव के अनेकों शिवालय है, जिनमें से अधिकतर का अपना अलग पुरातात्विक और पौराणिक महत्व भी है। पुराणों में बारह ज्योर्तिलिंग के अलावा भी शिव के पवित्र स्थानों का उल्लेख मिलता है। प्रत्येक स्थान से जुड़ी अनेक कथाएँ हैं तथा इसका खगोलीय महत्व भी है। हम जानते हैं कि प्रमुख रूप से भगवान शिव के कौन-कौन से स्थान है।

कैलाश पर्वत : कैलाश पर्वत भगवान शिव का मुख्‍य निवास स्थान है। कैलाश पर्वत चीन के तिब्बती इलाके में है। पर्वत के नजदीक ही विश्व प्रसिद्ध मानसरोवर झील है जहाँ माँ पार्वती स्नान करती थी। पुराणों अनुसार उक्त स्थान के नीचे ही पाताल लोक है जहाँ भगवान विष्णु विराजमान है। कैलाश पर्वत के लाखों योजन ऊपर ब्रह्मा का स्थान माना गया है।

ज्योतिर्लिंग : ज्योतिर्लिंग उत्पत्ति के संबंध में अनेकों मान्यताएँ प्रचलित है। विक्रम संवत के कुछ सहस्राब्‍दी पूर्व उल्कापात का अधिक प्रकोप हुआ। आदि मानव को यह रुद्र का आविर्भाव दिखा। शिव पुराण के अनुसार उस समय आकाश से ज्‍योति पिंड पृथ्‍वी पर गिरे और उनसे थोड़ी देर के लिए प्रकाश फैल गया। यही उल्‍का पिंड बारह ज्‍योतिर्लिंग कहलाए।


12 ज्योतिर्लिंग :- (1) सोमनाथ, (2) मल्लिकार्जुन, (3) महाकालेश्वर, (4) ॐकारेश्वर, (5) वैद्यनाथ, (6) भीमशंकर, (7) रामेश्वर, (8) नागेश्वर, (9) विश्वनाथजी, (10) त्र्यम्बकेश्वर, (11) केदारनाथ, (12) घृष्णेश्वर

अमरनाथ : वैसे जो जम्मू और कश्मीर में सैकड़ों प्राचीन शिव मंदिर है और हिन्दू पंडितों द्वारा पलायन करने के बाद सैंकड़ों मंदिर तोड़ दिए गया है किंतु विश्व प्रसिद्ध अमरनाथ तीर्थ स्‍थल का ही ज्यादा महत्व है। यह वह स्थान है जहाँ भगवान शिव ने माँ पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। इस स्थान को अमरनाथ की गुफा कहा जाता है। स्थानीय लोग इसे ‘बर्फानी बाबा’ की गुफा के नाम से पुकारते हैं। गुफा श्रीनगर से उत्तर-पूर्व में 135 सहस्त्रमीटर दूर समुद्रतल से 13,600 फुट की ऊँचाई पर स्थित है। इस गुफा की लंबाई 19 मीटर, चौड़ाई 16 मीटर और ऊँचाई 11 मीटर है।

अरुणाचलेश्वर मंदिर : यह बहुत ही प्राचीन मंदिर है जो एक विशालकाय पर्वत पर स्थापित है। तिरुअन्नामलाई नामक कस्बे में स्थित यह मंदिर चेन्नई से 187 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर से जुड़ी कथा का शिव पुराण में उल्लेख मिलता है। भगवान शिव के पंचभूत क्षेत्रों में से एक अरुणाचलेश्वर मंदिर को अग्नि क्षेत्र माना जाता है जबकि काँची और तिरुवरुवर को पृथ्वी, चिदंबरम को आकाश, कलष्टी को वायु और तिरुवनिका को जल क्षेत्र माना जाता है।

श्रीकालहस्ती : आंध्रप्रदेश के तिरुपति शहर के पास पेन्नारजी की शाखा स्वर्णामुखी नदी के तट पर बसा कालहस्ती नामक स्थान पर भगवान शंकर का बहुत ही प्राचीन मंदिर स्थित है, जिसका उल्लेख पुराणों में मिलता है। दक्षिण भारत में स्थित भगवान शिव के तीर्थस्थानों में इस स्थान का विशेष महत्व है। नदी तट से पर्वत के तल तक विस्तारित इस स्थान को दक्षिण कैलाश व दक्षिण काशी नाम से भी जाना जाता है।

सिद्धनाथ महादेव : पाँडवों ने मालवा क्षेत्र में पाँच शिव मंदिर बनाएँ थे उनमें से एक है सिद्धनाथ महादेव का मंदिर। यह मंदिर पुण्य सलिला नर्मदा के किनारे बसे नगर नेमावर में स्थित है। ऐसी किंवदंती भी है कि सिद्धनाथ मंदिर के शिवलिंग की स्थापना चार सिद्ध ऋषि सनक, सनन्दन, सनातन और सनतकुमार ने सतयुग में की थी। इसी कारण इस मंदिर का नाम सिद्धनाथ है। हिंदू और जैन पुराणों में इस स्थान का कई बार उल्लेख हुआ है। इसे सब पापों का नाश कर सिद्धिदाता ‍तीर्थस्थल माना गया है।

कर्णेश्वर महादेव : मालवांचल में कौरवों-पांडवों ने अनेक मंदिर बनाएँ थे जिनमें से एक है सेंधल नदी के किनारे बसा यह कर्णेश्वर महादेव का मंदिर। करनावद (कर्णावत) नगर के राजा कर्ण यहाँ बैठकर ग्रामवासियों को दान दिया करते थे इस कारण इस मंदिर का नाम कर्णेश्वर मंदिर पड़ा। मध्यप्रदेश के इंदौर से 30 किलोमिटर पर स्थित देवास जिले में स्थित है करनावद ग्राम।

नटराज मंदिर चिदंबरम : तमिलनाडु में चिदंबरम का नटराज मंदिर चेन्नई-तंजावुर मार्ग पर चेन्नई से 245 किमी दूर स्थित है। पुराणों के मुताबिक भगवान यहाँ प्रणव मंत्र ‘ॐ’ के आकार में विराजमान हैं। भगवान शिव के पाँच क्षेत्रों में से एक है चिदंबरम। इसे शिव का आकाश क्षेत्र कहा जाता है। अन्य चार क्षेत्रों में कालाहस्ती (आंध्रप्रदेश) अर्थात वायु, कांचीपुरम यानी पृथ्वी, तिरुवनिका- जल और अरुणाचलेश्वर (तिरुवनामलाई) अर्थात अग्नि शामिल हैं। शिव के नटराज स्वरूप के नृत्य का स्वामी होने के कारण भरतनाट्यम के कलाकारों के लिए इस स्थान का खास महत्व है।

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