बुधवार, 19 सितंबर 2012

डर गए बिहारियों को डराने वाले


 शेखर झा
पिछले कई सालों से आर्थिक राजधानी मुम्बई में रह रहे बिहारियों को मनसे के अध्यक्ष राज ठाकरे ने खदेरने की बात कही थी। राज ठाकरे जी को जब कोई मुद्दा नहीं मिलता है, तो कमजोर व असहाय बिहारियों पर अत्याचार जैसी घटना को अंजाम देने लगते हैं। मुम्बई में रह रहे बिहारी लोग बिहार शताब्दी समारोह आयोजित कर रहे है। उस कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार शिरकत करने के लिए शनिवार को रवाना हो गए। देखने वाली बात यह होगी कि राज ठाकरे जी क्या करते हैं? उन्होंने पिछले दिनों एक सभा में कहा था कि अगर बिहार दिवस मुम्बई में बिहारी मनाएंगे, तो अंजाम बुरा होगा और मुख्यमंत्री नीतिश कुमार को नहीं आने की बात कही थी। कार्यक्रम में बिहार के सुपर स्टार भोजपुरी सिंगर मनोज कुमार, उदित नारायण के अलावा अन्य कलाकार अपना परफोरमेंस देंगे। राज ठाकरे जी के तीखे तेवर देखने के बाद और मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के आने की सूचना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर दिया है। कार्यक्रम के दौरान किसी भी तरह की दिक्कते नहीं आने की बात भी कहीं। इतना कुछ होने के बाद अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिहारियों को डराने और चमकाने वाले खुद ही चमक गए।

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

हिन्दुस्तां हमारा है...

हिन्दुस्तां हमारा है। देश की आजादी का जश्न पूरे देश के लोग मनाते हैं, तो कितना खुशी होता है, लेकिन इन दिनों बिहारियों को देखकर जलने वाले लोग कुछ इस कदर मारपीट करने को तैयार है, उसको बयां नहीं किया जा सकता है। मनसे के अध्यक्ष राज ठाकरे ने जो बिहारियों को लेकर तीखी बात कही, वह काफी दुखदाई है। उनको बिहारियों से माफी मांगना होगा। बात चाहे बिहार दिवस मनाने की क्यों न हो। आज कोई मुम्बई में बिहारी मरता है, तो क्या उसको लोग नहीं हेल्प करते हैं। राज ठाकरे जी अभी भी समय है। राजनीति में आगे बढऩा है, तो बिहारियों को निशाना न बनाए। अगर गलती से भी बिहारियों ने आपको निशाना बनाया, तो पता नही क्या होगा। इसलिए जहां तक हो सके राजनीति में आगे बढऩे के लिए बिहारियों को निशाना न बनाकर दूसरा फंडा अपना लें। उत्तरी भारतीय विधायक अबू असिम आजमी बिहार वालों का साथ दे रहे हैं। जिसके चलते राज ठाकरे के नमुने लोग उनके साथ मारपीट जैसी घटनाओं का अंजाम दे रहे हैं, लेकिन यह गलत है। महाराष्ट्र सरकार के लिए यह विषय चिंता जनक है। अगर सरकार ऐसे ही हाथ पर हाथ रखकर बैठी रही, तो अंजाम बुरा हो सकता है। इसलिए सोचे हुए शेर को इल्ली नहीं करना चाहिए।

शनिवार, 17 मार्च 2012

खत्म हुआ इंतजार, कर दिया चमत्कार

सचिन के सौवें शतक पर झूमी ट्विनसिटी
जिस पल का इंतजार सचिन और उनके चाहने वालों को था, आखिरकार शुक्रवार को वह पल आ ही गया। क्रिकेट के भगवान मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने ११ वें एशिया कप के दौरान बांग्लादेश के खिलाफ अपना महाशतक पूरा कर लिया। सचिन के सौवें शतक के लिए लोगों ने साल भर इंतजार किया। शतक जैसे ही पूरा हुआ, शहर के चौक-चौराहों से लेकर गली-मोहल्लों तक खुशी की लहर दौड़ गई और लोगों ने मिठाई से एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। सौवेंं शतक पर शहर के क्रिकेट प्रेमियों ने पूरे उत्साह से सचिन को बधाई दी।
रच दिया इतिहास
सचिन के सौवें शतक ने इतिहास रच दिया है। क्रिकेट जगत में देखा जाए, तो सचिन जैसे एम्बेस्डर नहीं मिलेंगे। सचिन के इस शतक ने इंडिया टीम का भी हौसला बढ़ाया है।
- राजा गोपालन, बीएसपी क्रिकेट प्रशिक्षक
अभी और खेलना चाहिए
सचिन के इस शतक ने इंडिया टीम को एक नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है। सचिन जब क्रिकेट जगत में आए थे, तो किसी को उम्मीद नहीं था कि कुछ ऐसा कर जाएंगे, लेकिन सचिन ने लोगों में उम्मीद जगाई और उसको पूरा कर दिखा दिया। सचिन को इंडिया टीम के लिए और खेलना चाहिए।
- राजेश चौहान, इंटरनेशनल क्रिकेट प्लेयर्स
जुनून ने दिलाया मुकाम
सचिन में क्रिकेट के प्रति पहले दिन से ही जज्बा और जुनून देखने को मिल रहा था। उसके निरंतर बरकरार रहने का ही ये फल है। सचिन ने जो मुकाम हासिल किया है वह शायद ही आने वाले समय में कोई प्राप्त कर सके। पिछले दिनों सचिन के खराब परफोरमेंस के चलते सीनियर खिलाडिय़ों ने संन्यास लेने की बात कही थी, लेकिन सचिन ने अपने परफोरमेंस को सही करते हुए महाशतक बना लिया।
- राजा बेनर्जी, क्रिकेट कोच, सेल
ले लेना चाहिए सन्यास
सचिन के लिए आज का दिन काफी खास रहेगा। उन्होंने नया इतिहास रच डाला है। लोगों की उम्मीद टूट चुकी थी कि सचिन अपना सौवां शतक बना पाएंगे, लेकिन उन्होंने निराश नहीं किया। बात संन्यास की करें, तो वह सचिन खुद ही जानते हैं। सचिन के संन्यास लेने का ये सबसे अच्छा मौका है।
- परमजीत सिंह,
... तो खेलेगा कौन
क्रिकेट जगत में शायद ही ऐसा कोई खिलाड़ी होगा, जो अपना सौ शतक बना पाएगा। अगर सभी सीनियर खिलाड़ी संन्यास ले लेंगे, तो टीम में खेलने के लिए कौन बचेगा।
- वी. मोहन दास, पूर्व क्रिकेट प्लेयर
बांग्लादेश के खिलाफ भी शतक
सचिन ने सौवां शतक पूरा करने के साथ एक और मुकाम हासिल कर डाला। अभी तक सचिन ने एक दिवसीय मैचों में बांग्लादेश के खिलाफ शतक नहीं लगाया था। वह हसरत भी पूरी हो गई।
- अभय कुमार, क्रिकेट प्लेयर
वर्षगांठ पर सचिन का तोफा
इंडिया टीम और सचिन के लिए आज का दिन यादगार साबित रहेगा। वैसे भी क्रिकेट जगत से जुड़े अधिकतर लोगों को आज का दिन याद रहता है। क्योंकि आज विश्व क्रिकेट का वर्षगांठ है। एक तरह से सचिन ने खुद का सौवां शतक तो बनाया ही साथ ही विश्व क्रिकेट के वर्षगांठ पर तोहफा भी दे दिया। सचिन के इस शतक ने टीम को नए नए मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है।
- हरप्रीत सिंह, क्रिकेट प्लेयर

काफी उम्मीदें अखिलेश भईया से

अभी तक के सबसे युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हैं। उत्तर प्रदेश की जनता को उनके उपर पूरा विश्वास है कि वह यूपी के खराब छवि के साथ महिलाएं व लड़कियों के साथ होने वाले अत्याचार और अनाचार को खत्म कर देंगे। जब अखिलेश चुनावी मैदान में उतरे थे, तभी जनता ने फेसला ले लिया था कि अब की बार माया दीदी को नहीं, बल्कि अखिलेश भईया को प्रदेश की कमान देनी हैं। अभी तक तो जितने भी नेता आएं वह अपना कोई खास छवि नहीं छोड़ पाएं, लेकिन युवा नेता अखिलेश भईया से काफी उम्मीदे हैं। वैसे भी अभी तक कोई खास नेता के हाथ प्रदेश की कमान नहीं थी, लेकिन इस तस्वीर में अखिलेश भईया को एक नजर में जन सकते है

गुरुवार, 15 मार्च 2012

बढऩा चाहिए टैक्स का स्लेब

केन्द्रीय बजट को लेकर शासकीय कर्मचारियों की अपनी अपेक्षाएं
केन्द्रीय बजट १६ मार्च को पेश होने वाला है। जिसको लेकर ट्विनसिटी के प्राइवेट के साथ शासकीय सेक्टर में भी हलचल है। सभी को बजट से काफी कुछ अपेक्षाएं हैं। आगामी बजट को लेकर शासकीय कर्मचारियों की अपेक्षाओं को जानने की कोशिश की। चर्चा के दौरान अधिकतर लोगों ने वर्तमान टैक्स स्लेब को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया है।
सामानों पर लगता है टैक्स ज्यादा
टैक्स स्लेब के कम होने से मध्यमवर्गीय परिवार को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बात निम्न वर्गीय और उच्च वर्गीय परिवार की करें, तो उनको कोई परेशानी नहीं होती है। आगामी दिनों में पेश होने वाले बजट में सरकार को मध्यम वर्गीय परिवार को ध्यान में रखकर टैक्स का स्लेब तय करना चाहिए। टैक्स के बढऩे से सामानों पर भी टैक्स कम लगेगा।
- डॉ. रेश्मा लाकेस,
इनकम से ज्यादा टैक्स
नौकरी पेशे वालों को ध्यान में रखकर बजट पेश होना चाहिए। क्योंकि इनकम बढ़ता है, तो टैक्स भी बढ़ जाता है। इसलिए बजट में टैक्स के स्लेब को बढ़ाना चाहिए। जिससे नौकरी पेशे वालों को राहत मिल सके। वैसे भी बजट में प्राइवेट सेक्टर वालों को ज्यादा फायदा मिलता है, क्योंकि वे अपने इनकम को एक बार छुपा भी लेते है, लेकिन शासकीय कर्मचारी का इनकम छुप पाता। बजट में दोनों सेक्टर को ध्यान में रखकर टैक्स का स्लेब फिक्सड करना चाहिए।
- डॉ. रिचा ठाकुर,
टैक्स देना पड़ता है दोगुना
सरकारी कर्मचारियों के वेतन में समय-समय पर वृद्धि होती है, लेकिन टैक्स की कोई सीमा तय नहीं है। टैक्स का स्लेब कम होने से कर्मियों को दोगुना भुगतान करना पड़ता है। केन्द्रीय बजट में टैक्स को लेकर अवश्य ही सही निर्णय लेना चाहिए। जहां तक हो सके टैक्स के दायरे को बढ़ाना चाहिए।
- डॉ. रितु दुबे,
कम है टैक्स का स्लेब
वर्तमान समय में टैक्स का स्लेब काफी कम है, जिसके चलते मध्यमवर्गीय परिवार को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अलग से इनकम वालों को कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन सेलरी बेस पर रहने वालों को अधिक परेशानी है। सेलरी का जो टैक्स साल भर में कटता है, अगर टैक्स का दायरा बजट में बढ़ता है, तो उस राशि को लोग सेव कर सकेंगे।
- संजय सिंह,
टैक्स का स्लेब ३ लाख हो
टैक्स का स्लेब १ लाख ६० हजार होने के कारण सभी क्लास के कर्मचारी शामिल हो जाते हैं। बजट में सरकार को टैक्स का स्लेब कम से कम ३ लाख करना चाहिए, जिससे थर्ड क्लास के कर्मचारी शामिल न हो सके। जिस तेजी से महंगाई बढ़ रही है, सरकार को उसी तर्ज से टैक्स का स्लेब भी बढ़ाना चाहिए।
- योगेन्द्र त्रिपाठी,
ढ़ाई लाख पर लगना चाहिए टैक्स
महंगाई दिनों-दिन बढ़ते जा रही है। इससे मध्यम वर्गीय परिवार कुछ नहीं कर पाता है। शासकीय कर्मचारी अपनी इनकम को छूपा भी नहीं पाते। जिसके चलते पूरा का पूरा टैक्स पटाना पड़ता है। इस बार के केन्द्रीय बजट में टैक्स का स्लेब कम से कम ढाई लाख तक बढ़ाना चाहिए।
- बबीता दुबे,
इनकम से ज्यादा खर्च
महंगाइ दिनों दिन बढ़ते ही जा रही है, लेकिन टैक्स का स्लेब वहीं का वहीं है। अगर सरकार किसी भी सामान के दाम में वृद्धि करती है, तो महंगाई के अनुरूप टैक्स का भी ध्यान रखना चाहिए। इसी तरह महंगाई बढ़ते गई और टैक्स का स्लेब इतना ही रहा, तो इंसान जितना कमाएगा नहीं, उससे ज्यादा टैक्स में भुगतान कर देगा। बजट में टैक्स को लेकर कुछ न कुछ बदलाव करना चाहिए।
- सुषमा यादव,
नौकरी पेशे वालों को दिक्कत
वर्तमान में टैक्स का स्लेब इतना कम है कि इसमें अमुमन सभी क्लास के कर्मचारी आ जाते हैं। आगामी दिनों में पेश होने वाले बजट में सरकार को महंगाई को ध्यान में रखते हुए टैक्स के स्लेब का बढ़ाना चाहिए। अगर नहीं बढ़ता है, तो उसको कोई सही रास्ता निकाला जाना चाहिए, जिससे कर्मचारियों को राहत मिल सके। टैक्स का असर मध्यमवर्गीय लोगों पर ही अधिक पड़ता है।
- एलके अग्रवाल,
महंगाई व टैक्स से सभी परेशान
वर्तमान समय में महंगाई इंसान की कमर तोड़ ही रही है। साथ ही टैक्स का स्लेब भी कम होने के कारण परेशानी और बढ़ गई है। १६ मार्च को पेश होने वाले बजट में आम जनता को कुछ मिले न मिले, लेकिन टैक्स स्लेब कम से कम ढ़ाई लाख रुपए तक कर देना चाहिए। जिससे टैक्स के दायरे में छोटे कर्मचारी शामिल न हो सके।
- कमल साहू

मंगलवार, 13 मार्च 2012

शिक्षा के लिए खुले पिटारा

ट्विनसिटी के शिक्षाविदें ने कहा, शिक्षा को बेहतर बनाने की जरूरत
शिक्षा को बजारवाद न बनाकर, शिक्षा प्रणाली को शिक्षा की तरह रहने दे, तो काफी सही रहेगा। वर्तमान समय में अगर कोई निम्न वर्ग या फिर मीडिल क्लास का बच्चा अच्छी शिक्षा प्राप्त करने की बात करें, तो वह नहीं ग्रहण कर सकता है। क्योंकि समय के साथ-साथ शिक्षा संबंधी सभी सुविधाएं महंगी हो गई है। बात चाहे शासकीय व अशासकीय स्कूल व कॉलेज की करें, तो हर जगह शिक्षकों की कमी है। यही वजह है कि बच्चों को अच्छी सुविधा नहीं मिल रही है। १६ मार्च को केन्द्रीय बजट पेश होने को है। इस बजट से भिलाई-दुर्ग के शिक्षाविदें को शिक्षा को लेकर काफी अपेक्षाएं हैं। आगामी केंद्रीय बजट को लेकर पत्रिका ने शिक्षाविदों से चर्चा की। इस दौरान शिक्षाविदें ने शिक्षा को बेहतर बनाने विशेष प्रस्ताव लाने पर जोर दिया। उन्होंने शिक्षा को बाजारवाद न बनाने की बात कही। उनका मानना है कि आने वाले बजट में शिक्षा को लेकर पिटारा खुलना चाहिए। इससे सभी वर्ग के बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
शिक्षकों की कमी दूर हो
बात चाहे स्कूल की करें, या फिर कॉलेज की, हर जगह शिक्षकों का टोटा है। जिसका असर पढ़ाई पर पड़ता है। पेश होने वाले बजट में शिक्षकों को लेकर पर्याप्त राशि का प्रावधान जरूरी है। स्कूल व कॉलेज में संविदा और शिक्षाकर्मियों के भरोसे स्टूडेंट्स की पढ़ाई न हो। स्कूल व कॉलेज में पर्याप्त शिक्षक होंगे, तो शिक्षा का स्तर ऊंचा होगा तथा बच्चों को भी इसका लाभ मिलेगा।
- डीएन शर्मा, शिक्षाविद्
रिसर्च के लिए संसाधन बढ़े
जिस प्रकार देश में बड़े-बड़े संस्थान है, उस हिसाब से स्टूडेंट्स के रिसर्च के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं है। शिक्षा को बेहतर करने के लिए अनेक योजनाएं शुरू होती है, लेकिन सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं होने के कारण इसका लाभ सभी वर्ग के स्टूडेंट्स को नहीं मिल पाता है। आगामी बजट में रिसर्च और योजनाओं के अधिक से अधिक धनराशि का प्रावधान की आवश्यकता है।
- पीबी देशमुख, शिक्षाविद्
वो तो समय ही बताएगा
बजट में शिक्षा को लेकर क्या होगा, वो तो समय ही बताएगा। शिक्षा को लेकर सभी वर्ग के बच्चों को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार की जानी चाहिए। वर्तमान समय में गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए राईट टू एजुकेशन है, जिसके माध्यम से गरीब वर्ग के बच्चों को किसी भी स्कूल में प्रवेश लेकर पढ़ाई करने का प्रावधान हैं, लेकिन इसका पालन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। महंगाई में गरीब वर्ग के बच्चों को सही शिक्षा देने के लिए बजट में विशेष प्रस्ताव की जरूरत है।
- आनंद त्रिपाठी, शिक्षाविद्
आईआईटी खुलनी चाहिए
शिक्षा के क्षेत्र में कोटा के बाद भिलाई का नाम आता है, लेकिन कोटा जैसी यहां पर कोई सुविधा नहीं है। आगामी दिनों में पेश होने वाले बजट में भिलाई में आईआईटी खुलने का प्रस्ताव परित होना चाहिए। छत्तीसगढ़ के स्टूडेंट्स आईआईएम जैसे संस्थान का लाभ उठा रहे हैं। सब कुछ ठीक-ठाक रहा, तो आने वाले दिनों आईआईटी जैसी संस्थान का लाभ उठा पाएंगे।
- संजय रुंगटा, शिक्षाविद्
शिक्षित सामाज से देश की तरक्की
शिक्षा जिनती अच्छा रहेगी, उतना ही समाज शिक्षित होगा और समाज शिक्षित होगा, तो देश प्रगति करेगा। बजट की बात करें, तो स्टूडेंट्स के लिए बड़े संस्थानों की जरूरत है। रिसर्च पर ज्यादा ध्यान देना होगा। वैसे तो आए दिन स्टूडेंट्स कुछ न कुछ रिसर्च करते रहते हैं, लेकिन उनको सही दिशा और दशा नहीं मिल पाती है।
- अजय प्रकाश वर्मा, शिक्षाविद्
सर्विस टैक्स में न हो बढ़ोतरी
शिक्षा के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं पर शिक्षा अब एक महंगा सौदा हो गया है। अगर बजट में सर्विस टैक्स में बढ़ोतरी होगी तो प्राइवेट ट्यूशन क्लासेस की फीस भी बढ़ेगी। जिससे शिक्षा हासिल करना महंगा सौदा हो जायेगा। आज के युग में शिक्षा से संबधित खर्चे आसमान छू रहे हैं। अभिभावकों को शिक्षण संस्थान तय करने से पहले कई बार सोचना पड़ता है।
- अंकिता प्रोफेसर
नहीं बैठता तालमेल
सरकार और उनके बजट का आम लोग के साथ सहीं तालमेल नहीं बैठ पाता है। स्कूली शिक्षाओं को लेकर लागू की गई योजनाओं में ग्रामीण और शहरी स्तर पर योजनाओं को रिसर्च करके लागू करने की जरूरत है। ताकि बच्चों को सही बैनीफिट मिले और स्कूली शिक्षा का विकास हो। इस बजट से यही आशा है कि स्कूली शिक्षा और योजनाओं के लिए ज्यादा उपहार हो।
- शशिक ला साहसी
शिक्षक एवं लायनेस क्लब सचिव
स्कॉलरशिप फंड मिले
पढ़ाई में अच्छे स्टूडेंट के लिए कई बार ज्यादा फीस की वजह से एजुकेशन कम्पलीट नहीं हो पाता है। गर्वेरमेंट कॉलेजों के अलावा प्राइवेट सेक्टर पर भी अध्ययन के लिए सरकारी स्कॉलरशिप में बढ़ोतरी करनी चाहिए ताकि मेधावी स्टूडेंट का कैरिअर बन सके। इसके अलावा ये फंड स्टूडेंट को जल्द से जल्द मिले।
- एचएल साहू प्रोफेसर
बढ़े मेडिकल की सीटें
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी डॉक्टर की कमी है। जैसे आज हर प्रदेश में कई इंजीनियरिंग कॉलेज है, उसी तरह मेडिकल की सीटों में भी वृद्वी जरूरी है ताकि ज्यादा स्टूडेंट डॉक्टर बन सके और शिक्षा के साथ चिकित्सा के क्षेत्र में भी वृद्वी हो।
- अनु नायक
प्रोफे सर
शिक्षा का स्तर सुधारने की जरूरत
अच्छे भवन और अच्छे फर्नीचर के होने से शिक्षा का स्तर नहीं सुधारा जा सकता है। वर्तमान समय में शिक्षा की दिशा काफी दयनीय है। दसवीं बोर्ड को ग्रेडिंग सिस्टम कर दिया गया, इससे स्टूडेंट्स टेंशन फ्री होकर परीक्षा दे रहे हैं, लेकिन इस सिस्टम से स्टूडेंट्स के अंदर से बोर्ड एग्जाम का भय ही खत्म हो गया। शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए अच्छे फर्नीचर और भवन नहीं, बल्कि अच्छे शिक्षकों की जरूरत है, जो शिक्षा के स्तर को सुधारने में मदद करेंगे।
- डॉ. संतोष राय, शिक्षाविद्

सोमवार, 12 मार्च 2012

नहीं बनना चाहेगा कोई आईपीस अधिकारी

पिछले दिनों मुरेना के जबाज ऑफिसर नरेन्द्र कुमार को खनिज माफियों ने मोत के घाट उतार दिया....मोत की स्थिति को देख कर नहीं लगता है कि किसी ने मारा होगा... लेकिन खनिज माफियों ने अपनी खुनस निखालने के लिए ट्रक से कुचल कार मर डाला... ऑफिसर होने के कारण बात आमलोगों तक जल्दी पहुँच गई... नहीं तो भनक तक नहीं लगने देते खनिज माफिया वाले.... ऑफिसर के मोत पर राजनेता कोई सपोर्ट नहीं कर रहे है, बल्कि उल्टा उनके परिवार वालों को फ़िल्मी डाइलोग मर रहे है.... एक मंत्री ने कहा कि मप्र कि सरकार हाथ में चुरी नहीं पहनी है.... उलटे सीधे ब्यान देना बंद नहीं किए... तो उसका भुगतान भरना पर जायेगा.... राजनेता के बयां से साफ जाहिर होता है कि खनिज माफिया और मप्र के राजनेताओं में कितनी सं गांठ है... वेसे मप्र और छग दोनों सरकार खुद को भाई भाई मानते है.... वेसा ही देखने को भी मिला... मप में जन्वाज ऑफिसर के मरने के बाद छग के बिलासपुर के एसपी राहुल शर्मा ने भी खुद को अपने रिवाल्वर से गोली मार ली.... इन दिनों क्या हो गया कि आईपीस रेंक के अधिकारी खुद को गोली मर रहे है.... अधिकारीयों के मरने से साफ जाहिर होता है कि प्रदेश की सरकार निकामा है.... अगर एसे ही राजनेता खनिज माफियाओं से सं गांठ करते रहे तो कोई भी आईपीस बनना नहीं चाहेगा.... आईपीस की छबि को सही करने के लिए सरकार को खुद के दूतों को सही रस्ते पर लेन की जरुरत है...

रविवार, 11 मार्च 2012

किचन बजट पर देना होगा ध्यान

केन्द्रीय बजट से पहले महिलाओं ने जाहिर की अपनी अपेक्षाएं
दिनों दिन बढ़ रही महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है। महंगाई के चलते लोगों को बजट से कोई खास उम्मीद अब नहीं रहती है। बजट चाहे केन्द्र का हो या फिर राज्य का, लोग महंगाई के चलते बजट को लेकर कुछ कहने की स्थिति में नहीं रहते। शुक्रवार को शेखर झा ने शहर की गृहिणी से आगामी केंद्रीय बजट को लेकर बात-चीत की। इस दौरान किसी ने मंहगाई कम करने पर जोर दिया तो किसी ने हाउसिंग लोन के टैक्स, गैस के दाम कम करने की बात कही। महिलाओं का कहना है कि किसी भी सामान के दाम में सरकार वृद्धि करती है, तो एक बार कर दे। सामानों के दामों में बार-बार वृद्धि होने से घर का बजट बिगड़ जाता है।
महीने का बिगड़ता है बजट
चाहे केन्द्रीय बजट हो या फिर राज्य बजट किसी से भी आम लोगों को राहत नहीं मिलती है। दिनोंदिन बढ़ रही महंगाई ने लोगों को परेशानी में डाल दिया है। कुछ दिनों में फिर से गैस के दाम बढऩे के संकेत मिल रहे हैं। बजट से गैस, पेट्रोल व दैनिक उपयोगी सामानों के दाम कम होने चाहिए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
- अनुजा अग्रवाल, गृहणी
गल्र्स चाइल्ड को मिले शिक्षा
बजट में तो सभी वर्ग के लोगों के लिए कुछ न कुछ होता है। वर्तमान की बात करें, तो लोग कहां से कहां पहुंच गए, लेकिन गरीब तबके के लोगों को अभी भी उचित शिक्षा नहीं मिल रही है। इस केन्द्रीय बजट में कुछ ऐसी होना चाहिए कि गरीब व असहाय गल्र्स चाइल्ड के लिए शिक्षा की समुचित व्यवस्था हो सके।
- लतिका राजन, गृहणी
कम होने चाहिए पेट्रोल के दाम
एक महीने में पेट्रोल के दो बार दाम बढऩे से अनुमान लगाया जा सकता है कि बजट से लोगों को क्या फायदा होगा। जब तक सरकार पेट्रोल के दामों पर अंकुश नहीं लगाएगी, तब तक सामानों के दामों में कमी नहीं आ सकती है। इसलिए इस बार के केन्द्रीय बजट में कम से कम सरकार को दैनिक उपयोगी सामानों के साथ पेट्रोल के दाम कम करने चाहिए।
- सुचित्रा शर्मा, गृहणी
गैस का दाम हो कम
दिनों दिन सामानों के रेट में बढ़ोत्तरी होने से किचन का बजट बिगड़ जाता है। केन्द्रीय बजट से यही आशा है कि सरकार जो कुछ भी करे, वह आम जनता को ध्यान में रखकर करे। पिछले दिनों गैस के दाम में वृद्धि हुई थी और आने वाले दिनों में भी गैस के दाम में वृद्धि होने की खबर है। इससे परेशानी और बढ़ जाएगी।
- रमा भट्ट, गृहणी
बजट से लोगों को मिले राहत
अगर मार्केट में किसी भी सामान का रेट बढ़ता है, तो उसका असर किचन के बजट पर पड़ता है। इसलिए केन्द्रीय बजट में किचन संबंधित सामानों के रेट कम होने चाहिए। आए दिन सामानों के दामों में वृद्धि होती रहती है। जिसका खमियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है।
- कविता बंसल, गृहणी

आसान नहीं होगा नंबर तीन को भरना

राहुल द्रविड़ के सन्यास पर पूर्व खिलाडिय़ों
की प्रतिक्रिया
भिलाई. भारतीय क्रिकेट टीम की दीवार कहे जाने वाले स्टार बल्लेबाज राहुल द्रविड़ ने शुक्रवार को क्रिकेट के हर फॉरमेट को अलविदा कह दिया। राहुल द्रविड़ के सन्यास के साथ ही टेस्ट क्रिकेट के एक युग का अंत हो गया है। उनके डिफेंस को लम्बे समय तक याद किया जाएगा। द्रविड़ ने टेस्ट क्रिकेट में सचिन के बाद सबसे ज्यादा रन बनाए हैं। राहुल के सन्यास को ट्विनसिटी के क्रिकेटरों ने सही समय पर सही निर्णय करार दिया है। साथ ही उनके जाने से खाली हुई नम्बर तीन पर बल्लेबाजी क्रम को भरना नए क्रिकेटरों के लिए बड़ी चुनौती बताया है।
आसान नहीं जगह भरना
टेस्ट क्रिकेट में नंबर तीन पर बल्लेबाजी करना हो तो राहुल से बढ़कर कोई नहीं है। उनके सन्यास लेने के बाद इस जगह को भरना आसान नहीं होगा। हालांकि उन्होंने सही समय पर सही निर्णय लिया है, टीम इंडिया को इनकी कमी हमेशा खलेगी।
मोहन दास, पूर्व रंजी खिलाड़ी
बेहतरीन सर्विस दी
राहुल द्रविड ने अपने करियर के १६ वर्षों में इंडियन क्रिकेट को बेहतरीन सर्विस दी है। द्रविड ने जिस समर्पण से क्रिकेट खेला है वह आने वाली पीढ़ी के लिए उदहारण है। उनके सन्यास के निर्णय ने भारतीय टीम से एक जुझारू खिलाड़ी कम हो गया है।
राजा बेनर्जी, कोच बीएसपी क्रिकेट टीम
दो सीरीज और खेलते
राहुल द्रविड का निर्णय सही है, लेकिन उन्हें दो सीरीज और खेलनी चाहिए थी। आस्ट्रेलिया दौरे के खराब प्रदर्शन के बाद देश को उनसे एक बड़ी पारी की उम्मीद थी। इसे वे घरेलू सीरीज में पूरा कर सकते थे। उसके बाद शान से सन्यास लेना था।
पी गोपाल राव, पूर्व रंजी खिलाड़ी
निर्णय सही है
राहुल द्रविड का निर्णय सही है, नेचुरल है। टीम इंडिया उन्हें मिस करेगी। उनके साथ खेलना मेरे लिए सौभाग्य की बात रही है। नंबर तीन पर बल्लेबाजी को लेकर टीम इंडिया की समस्या बढ़ जाएगी। क्यों कि दूसरी दीवार का मिलना इतना आसान नहीं है।
राजेश चौहान, पूर्व टेस्ट खिलाड़ीश्
समर्थकों को टीस
राहुल द्रविड उन चुनिंदा खिलाडिय़ों में से एक हैं जिनकी तकनीक शानदार रही है। एक खिलाड़ी के रूप में वे हमेशा शांत रहे हैं। उनके सन्यास लेने के बाद उनके समर्थकों को टीस पहुंची है, लेकिन इससे युवा खिलाडिय़ों को आगे आने का मौका भी मिलेगा।
राजा गोपालन, पूर्व रणजी खिलाड़ी

मंगलवार, 6 मार्च 2012

...भगवान भरोसे उत्तर प्रदेश की जनता

उत्तर प्रदेश में माया के नहीं रहने और मुलायम की सरकार बनाने का असर दिखने लगा है.... मंगलवार को मुलायम की फोज जित का जश्न मना रहे थे... तभी एक कार्यकर्त्ता ने गोली चला दी... जो ७ साल के बच्चे को लग गई... जिससे बच्चे की मोत हो गई.... कुछ देर के लिए भले ही उत्तर प्रदेश की जनता को ने सरकार की ख़ुशी होगी.... लेकिन मुलायम की फोज ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है.... साथ ही पत्रकारों पर हमला भी कर दिए... हमला के दोरान पत्रकार घायल हो गए.... साथ ही १५ कमरे को तोड़ दिए.... अब तो समय ही बताएगा की सही में सरकार सही है... या फिर सिर्फ बोलेन भर का है

रविवार, 4 मार्च 2012

शुक्रगुजार हूँ...

पत्रिका ने भिलाई संस्कार के जस्ट शनिवार को बंद कर दिए... उसके बदले में ८ पेज का पुलआउट रविवार से शुरू हो गया... जस्ट के बंद होने से मन में दुःख तो हुआ ही... लेकिन सिटी में काम करने का भी तो मोका मिल गया है... दो दिन पहले मेरे को क्राईम विट मिला है... अभी तक मेने सांस्कृतिक कार्यकम कवर किया है... लेकिन अब सिटी में भी काम करने का मोका मिला है... अब और नए नए लोगों से मिलना होगा... अभी तक मैं जस्ट में अच्छा कम किया था... रायपुर में भी काम किया हूँ और पिछले १० महीने से भिलाई में काम कर रहा था... आप लोगो का साथ रहा तो क्राईम विट में भी अच्छा काम करके दिखाऊंगा... क्राईम विट में मेरा साथ सीनियर पत्रकार नारद योगी दे रहे है.... इस विट में जो भी में अच्छा काम करूँगा... उसमें नारद योगी की अहम भूमिका होगी... में उनका शुक्रगुजार हूँ... जो उनके साथ कम करने का मोका मिला है....

गुरुवार, 1 मार्च 2012

वो तो समय ही बताएगा

सहवाग के नहीं रहने से टीम की हालत होगी खस्ता
शेखर झा
वीरेन्द्र सहवाग के चहेतों के लिए बुरी खबर है। बांग्लादेश में १२ मार्च से २२ मार्च तक आयोजित होने वाले एशिया कप वनडे टूर्नामेंट के लिए बुधवार को इंडियन टीम घोषण हो गई, लेकिन खराब परफोरमेंस से गुजर रहे वीरेन्द्र सहवाग को टीम में जगह नहीं दी गई। जिसको लेकर ट्विनसिटी के क्रिकेटप्रेमियों में काफी निराशा देखने को मिल रही है। सहवाग के टीम में नहीं रहने से कुछ नहीं होगा, लेकिन उनके दर्शकों में अभी से निराशा झलकने लगी है। बुधवार को शेखर झा ने शहर के क्रिकेट प्रेमियों से इस मुद्दे को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सहवाग के टीम में नहीं रहने से टीम पर असर देखने को तो मिलेगा ही। आस्ट्रेलिया दौरे में सहवाग और सचिन का कोई खास असर नहीं देखने को मिला, लेकिन जब कुछ कर दिखाने का समय आया, तो उनको टीम में ही शामिल नहीं किया गया। इंडिया टीम का चयन सही है, लेकिन तब जब सहवाग की जगह पर जिस खिलाड़ी को टीम में शामिल किया गया है, वे शानदार परफोरमेंस करें।
खिलाड़ी खराब नहीं है
वीरेन्द्र सहवाग खराब खिलाड़ी नहीं है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से खराब परफोरमेंस के चलते उन्हें टीम में शामिल नहीं किया गया है। सहवाग जब तक पीच पर बने रहते हैं तब तक बोलर से लेकर फिल्डर तक दहशत में रहते हैं कि कहां से गेंद निकल जाएगी। इंडियन टीम में सहवाग जिस लेवल के खिलाड़ी है, वैसे अभी तक एक भी नहीं है।
- टी. सुधीन्द्र, नेशनल क्रिकेट प्लेयर
कौन कब अच्छा खेल जाए
वीरेन्द्र सहवाग को टीम में फिटनेस सही नहीं होने के कारण शामिल नहीं किया गया। कारण कुछ भी हो, सहवाग के टीम में नहीं रहने से असर तो पड़ेगा ही। वैसे भी क्रिकेट में कब कौन खेल जाए पता नहीं चलता। पिछले मैच में खराब परफोरमेंस को लेकर सहवाग भी चिंतित थे।
- राजा गोपालन, क्रिकेट प्लेयर
दर्शकों में रहेगी निराशा
टीम में चाहे सहवाग रहे या न रहे, सचिन रहे या न रहे, कोई फर्क नहीं पडऩे वाला है, लेकिन ये खिलाड़ी ऐसे हैं, जिससे दर्शकों पर खास असर देखने को मिलता है। पिछले दिनों इंडिया टीम ने जो जीत हासिल की है, वे इन्हीं दोनों की देन है। सहवाग के नहीं रहने से टीम पर क्या असर पड़ेगा, वो तो समय ही बताएगा।
- राजेश चौहान, इंटरनेशनल क्रिकेट प्लेयर
अट्रेक्टिंग प्लेयर है सहवाग
सहवाग को टीम में शामिल क्यों नहीं किया गया, ये तो चयनकर्ता ही सही बता पाएंगे, लेकिन सहवाग अट्रेक्टिंग प्लेयर हैं। टीम में उनके नहीं रहने से मध्यम क्रम पर दवाब रहता है और जिस मैच में खेलते हैं, तो मध्यम क्रम पर दवाब नहीं रहता है। चयनकर्ताओं ने सहवाग को अनफिट होने के कारण टीम में शामिल नहीं किया है।
- राजा बेनर्जी, कोच, बीएसपी क्रिकेट टीम

सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

...जब 300 फीट नीचे नदी में गिर गई थी 'राजधानी

देश में रेल बजट पेश होने वाला है। इस बजट में बहुत सारे लोक लुभावन बातें शामिल होंगी, जिसमें सुरक्षा, नई ट्रेनें आदि शामिल होंगे। लेकिन इन वादों को वाकई में क्या अमलीजामा पहनाया जाएगा। ऐसा प्रतित नहीं होता। रेलवे की सुरक्षा हमेशा से ही चिंता का विषय रही है। कभी नक्सली हिंसा, तो कभी रेल दुर्घटना। नुकसान भारतीय रेल को होता है। भारतीय रेलवे के इतिहास में 10 सितम्बर 2002 का वो दिन हमेशा के लिए काला स्याह बनकर रह गया जब राजधानी एक्सप्रेस की एक पूरी बोगी गया के समीप रफीगंज के पास धावे नदी में गिर गया। रात के 10.40 हो रहे थे, सभी लोग ट्रेन में सफर के दौरान सोने का इंतजार कर रहे थे। कोलकाता से ट्रेन में 1000 यात्री सवार थे। गया के रफीगंज के पास ट्रेन अपनी तेज रफ्तार से धावे नदी क्रॉस कर रही थी। तभी ट्रैक से एक बोगी नीचे उतर गई। ट्रेन की वो पूरी बोगी 300 फीट नीचे गिर गई। उस बोगी में सवार सभी यात्रियों के अलावा दूसरे बोगियों के यात्री भी इस चपेट में आ गए और वो भी नीचे नदी में चले गए। इस घटना में नदी से 130 शव निकाले गए थे जबकि 50 लोग लापता थे। वहीं कुछ न्यूज रिपोर्ट की माने तो 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। साथ 150 से ज्यादा लोग घायल थे। इस घटना ने 6 जून 1981 को सहरसा के पास हुए ट्रेन हादसे की याद दिला दी थी।

डांस + धमाल = आरोहण २०१२

चांद सी मेहबूबा हो मेरी कब मैंने ऐसा सोचा था... ओ मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू... जैसे गानों से कॉलेज का प्रांगण गूंज रहा था। मौका था रुंगटा ग्रुप ऑफ कॉलेजेस के वार्षिकोत्सव 'आरोहण-२०१२Ó का। समारोह में सभी डिपार्टमेंट के स्टूडेंट्स पार्टीसिपेट किए।
शनिवार के शाम को यादगार बनाने के लिए प्रतिभागियों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। समारोह में शामिल होने के लिए सभी सज-धजकर पहुंच रहे थे। तीन ग्र्रुप में कॉम्पीटिशन आयोजित किया गया। जिसमें पहले ग्रुप में टेक्नीकल, दूसरे ग्रुप में स्पोटर्स और तीसरे ग्रुप में सांस्कृतिक कार्यक्रम का
आयोजन किया गया। विधि कॉम्पीटिशन में स्टूडेंट्स ने उत्साह के साथ पार्टीसिपेट किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि दुर्ग कलेक्टर रीना बाबा साहेब कंगाले थीं। अध्यक्षता रुंगटा ग्रुप ऑफ कोलेजेस के चेयरमेन संजय रुंगटा ने की। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम की शुरुआत भगवती वंदना प्रस्तुत करके किया। साथ ही मुख्य अतिथि ने प्रतिभागियों स्मृति चिन्ह और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने संदेश
समारोह के दौरान विधि कॉम्पीटिशन का आयोजन किया गया, लेकिन फेश पेटिंग के माध्यम से प्रतिभागियों ने पर्यावरण को सेव रखने का संकेत दिया। फेश कॉम्पीटिशन में प्रतिभागियों ने कई रोचक चित्रों को दर्शाया। किसी ने कटे हुए जंगल को, तो किसी ने हरे भरे जंगलों को। प्रतिभागियों के कलाकारी को देखकर सभी ने सराहा। प्रतिभागी मुक्ता ने अपने फ्रैंड के फेश पर पर्यावरण के बिगड़ते हुए चित्र को दर्शाया।
झूमने पर किया मजबूर
सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतिभागियों के साथ श्रोताओं ने भी फुल एन्जॉय किया, क्योंकि प्रतिभागियों ने श्रोताओं को एक साथ नए-पुराने गाने पर डांस और गाने सुनने का अवसर दिया। कॉम्पीटिशन में प्रतिभागियों ने चांद सी मेहबूबा हो मैंने कब ऐसा सोचा था... ओ मेरी सपनों की रानी तू कब आएगी... और भी ऐसे कई गानों की प्रस्तुति दी। प्रतिभागियों के परफोरमेंस ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
स्टूडेंट्स हुए पुरस्कृत
समारोह में पिछले दिनों आयोजित हुए परीक्षा, सांस्कृतिक कार्यक्रम व अन्य कॉम्पीटिशन में विजयी होने वाले स्टूडेंट्स का सम्मान किया गया। जिसमें कुलेश्वर प्रसाद मंडावी, आनंद साहू, विकास राज, अनुराग चौबे, राजकुमार साहू, कुणाल जैन, निकिता चौरसिया, कोमल चतुर्वेदी, अंकित कुमार के अलावा कई स्टूडेंट्स को स्मृति चिन्ह और प्रमाण पत्र दिया। इस अवसर पर डॉ. एसएस दास, डॉ. ए जगदीश, डॉ. ए वाणी के अलावा अन्य डिपार्टमेंट के प्रोफेसर और स्टूडेंट्स उपस्थित थे।
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'जो हूं सिस्टर के खातिर हूं

इंडियन आइडल के विनर मइयांग चैंग और अंकिता मिश्रा की शेखर झा से खास बातचीत
गानों का भी एक समय था, जो लोगों के सीधे दिलों में उतर जाया करते थे, लेकिन अब वे दौर खत्म हो चुके हैं। चैंग और अंकिता रॉकस्टार सिंगर भी मानते है कि पुराने जमाने के गाने लोगों के दिल को छू जाया करते थे, लेकिन अभी के अधिकतर सिंगर रीमेक हो गए हैं। समय और लोगों के च्वॉइस के साथ म्यूजिक का भी ट्रेंड बदल गया है। वैसा नहीं है कि अभी के रीमिक्स गाने लोगों को पसंद नहीं आते हैं, लेकिन पहले जैसा नहीं रहा। उक्त बातें इंडियल आइडल के विनर मियांग चैंग और अंकिता मिश्रा ने कहीं। वे रुंगटा ग्रुप ऑफ कॉलेजेस के वार्षिकोत्सव 'आरोहण-२०१२Ó में पार्टीसिपेट करने के लिए पहुंंचे हुए थे। इस दौरान उन्होंने शेखर झा के साथ अपने सफर के पलों को शेयर किया।
कानपुर की अंकिता मिश्रा कहना है कि अगर अपनी सिस्टर की बात को मान कर सही समय पर निर्णय नहीं ले लेती, तो आज ग्रेजुएशन की परीक्षा की तैयारी करते रहती। अंकिता दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर की तैयारी कर रही है। अंकिता इससे पहले भी कई कार्यक्रम में पार्टीसिपेट करने के लिए छत्तीसगढ़ में पांच बार आ चुकी हैं, लेकिन चैंग पहली भिलाई आएं हैं।
नहीं छोडऩा चाहिए पढ़ाई
चैंप और अंकिता कहती है कि अभी विभिन्न चैनलों पर नन्हें बच्चों से लेकर यंगस्टर्स तक के लिए विधि कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है। उस दौरान बच्चों ग्लैमर भी देखने को मिलता है, लेकिन इस दौरान वे अपनी पढ़ाई को छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से एक हाथ से ताली नहीं बजाई जाती, उसी प्रकार बिना पढ़ाई के कोई भी इंसान आगे नहीं बढ़ सकता है। बच्चों के लिए जितनी जरुरत ग्लैमर है, उससे कहीं ज्यादा पढ़ाई।
आई गृहग्राम का याद
इंडियन आइडल चैंप पहली बार भिलाई आए थे। उनको भिलाई की हरियाली को देखकर अपने गृहग्राम धनवाद की याद आ गई। चैंग कहते हैं कि जब मैं छोटा था, तो पढ़ाई के सिलसिले में अक्सर बाहर ही रहता था, जिसके कारण गांव का जो आनंद होता है, उससे मैं खुद को दूर रखा। चैंग कहते हैं कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है। उसी प्रकार गांव के माहौल से मैं भले ही दूर रहा, लेकिन जहां मुझे रहना चाहिए था, आज मैं वहां पर हूं।
जो करेगा वोटिंग, उसको ही बोलने का अधिकर
चैंप जब बैंग्लुरू में डायटिसियन की पढ़ाई कर रहे थे, तब से वह अपने कंधे पर 'मेरा नेता चोर हैÓ का टैग लगाकर घूम रहे हैं। बातचीत के दौरान जब उसके बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि इस टैग की बहुत ही लम्बी कहानी हैं। उस दौरान उन्होंने कहा कि अभी राजनीति में कोई भी सही राजनेता नहीं, जिसके चलते वह टैग लगाकर चल रहे हैं। चैंप एक बार भी वोटिंग नहीं किए हैं। उन्होंने कहा कि जिस दिन देश की कमान अच्छे राजनेताओं के हाथ में आ जाएगी, उस दिन वे अपने कंधे से टैग को उतार देंगे। नहीं तो ता उम्र कंधे पर लगाए घूमते रहेंगे।
मिलेगा मौका, तो गाऊंगा
चैंग और अंकिता को भले ही छत्तीसगढ़ी बोली के बारे में कुछ नॉलेज नहीं हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि अगर आने वाले समय में छत्तीसगढ़ी फिल्मों में गाने का अवसर मिला, तो जरूर उस अवसर को नहीं खोएंगे।

शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

वैलेंटाइन-डे के लिए सजने लगा मार्केट

फरवरी का इंतजार सभी को होता है। दोस्ती हो या प्यार का इजहार वैलेंनटाइन-डे को खास बनाने के लिए युुवाओं ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। वहीं मार्केट में भी वैलेंटाइन-डे को लेकर भी खासी तैयारी दिख रही है। ग्रिटिंंग शॉप से लेकर गिफ्ट कार्नर तक लोगों की भीड़ नजर आने लगी है।
शेखर झा
वैलेंटाइन-डे को अभी दस दिन बचे हैं, लेकिन लव वीक की शुरुआत चार दिन बाद यानी सात फरवरी से हो जाएगी। वैलेंटाइन डे और लव वीक को लेकर युवाओं में कुछ ज्यादा ही उत्साह है।युवा अपनी पसंद के गिफ्ट्स की खरीदारी में जुट गए हैं। कोई क्रिस्ट
ल की मूर्ति को, तो कोई फोटो फ्रेम गिफ्ट करने का प्लान बना रहा है। वहीं ट्विनसिटी के गिफ्ट कार्नर पर यंगस्टर्स की भीड़ देखने मिल रही है। यंगस्टर्स की डिमांड को देखकर गिफ्ट कार्नर वाले ने कई नए गिफ्ट आइटम मंगवाएं हैं, क्योंकि हर बार यंगस्टर्स अपने दोस्त को कुछ नए अंदाज में गिफ्ट देने हैं। वैसे भी फरवरी महीने के आते ही यंगस्टर्स की मौज मस्ती शुरू हो जाती है, क्योंकि लगातार सात दिनों तक लव वीक का हर डे स्पेशल होता है। जिसको युवा अपने अंदाज में दोस्तों के साथ सेलिब्रेट करते हैं। दोस्त के साथ दोस्ती का इजहार करने के लिए पॉलीस्टॉन की मूर्ति, टेडीवेयर, क्रिस्टल के रोज व अन्य कई सारे गिफ्ट मार्केट में उपलब्ध हैं।
दुकानों में बढ़ी रौनक
सिविक सेंटर स्थित गिफ्ट
कॉर्नर के संचालक आशीष खण्डेलवाल ने बताया कि वैलेंटाइन डे के पहले से ही दुकान में यंगस्टर्स की भीड़ आनी शुरू हो गई है। अपने दोस्त को गिफ्ट देने के लिए नई नई वेराइटी के सामानों की खरीदी करने में लगे हैं। इस बार के वैलेंटाइन डे को लेकर फैदर रोज, कोटेशन लवर, म्यूजिक टाईडी कोटेशन बुक के अलावा अन्य गिफ्टों की डिमांड है।
डॉल कहेगी आई लव यू
यंगस्टर्स अपने दोस्तों को कुछ नए स्टाइल में गिफ्ट देने के लिए मार्केट के चक्कर लगा रहे हैं। इस बार वैलेंटाइन डे में आई लव यू बोलने वाली डॉल की पूछपरख अधिक हो रही है। सेक्टर-६ स्थित गिफ्ट शॉप के संचालक रमेश कुमार ने बताया कि वैलेंटाइन डे के लिए इस बार नई डिजाइन की डॉल आई है, जो दोस्त का नाम लेकर आई लव यू भी बोलती है और साथ ही वैलेंटाइन डे
भी विश करती है।
यादगार गिफ्ट
गिफ्ट ऐसा हो कि जिसे देखकर आपका दोस्त हमेशा आपको याद रखे तो ऐसे यादगार गिफ्ट में इन दिनों कई ऐसी चीजें आई है जो इस दिन को यादगार बना दें। कॉफी का मग हो या टाइल्स या फिर, पिलो उस पर मैसेज के अपनी फोटो देख दोस्त खुशी से उछल पड़ेगा। शहर के कई गिफ्ट शॉप में ऐसी सुविधा मौजूद है, जहां बस आपको दोस्त की फोटो देनी होगी और आपका सरप्राइज गिफ्ट तैयार मिलेगा।
ये हैं स्पेशल डे
७ फरवरी - रोज डे
८ फरवरी - प्रपोज डे
९ फरवरी - चॉकलेट डे
१० फरवरी - टैडी डे
११ फरवरी - प्रॉमिस डे
१२ फरवरी - हग डे
१३ फरवरी - किस डे
१४ फरवरी - वैलेंटाइन डे

रविवार, 29 जनवरी 2012

...तो शहर रहेगा साफ-सुथरा

वेस्ट को सही ढंग से करें वेस्ट, लोग जागरूक हो जाएं, तो शहर की सुंदरता में चार चांद लग सकते हैं। घर में होने वाले कचरे को लोग कहीं भी फेंक देते हैं। जिसके चलते शहर के सुंदरता पर दाग तो लगते ही हैं, साथ ही गंदगी भी बढ़ जाती है। अगर घरों में होने वाले कचरे को व्यवस्थित ढंग से फेंका जाए, तो लोगों को गंदगी से छुटकारे के साथ शहर भी साफ-सुथरा नजर आएगा।
शेखर झा
अपने घर को सुंदर बनाने के लिए लोग घर की साफ-सफाई तो कर लेते हैं, लेकिन शहर को गंदा करने से नहीं चूकते। आखिर शहर की सफाई का जिम्मा भी नागरिकों का है ये बात शायद लोगों को याद नहीं रहती। लोग कचरे को कहीं भी खाली जगह पर फेंक देते हैं। चाहे वह खाली जगह अपने घर के सामने हो या किसी और के घर सामने।
महिलाओं की भूमिका अहम
घर की साफ-सफाई का जिम्मा महिलाओं पर होता है और अगर शहर को साफ रखना है तो महिलाओं को भी अपनी भूमिका समझनी होगी। पर्यावरणविदों की मानें तो घर ही पहला स्कूल होता है। अगर खुद माता-पिता ही घर के बाहर कचरा फैलाएंगे तो बच्चों को क्या सबक मिलेगा। महिलाएं अगर इन वेस्ट सामानों को सही ढंग से फेंके, तो शहर के सौंदर्यकृत होने में महत्वपूर्ण योगदान अदा कर सकती हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि शहर में इस तरह की दिक्कतों को महिलाएं कुछ पल में ही दूर नहीं कर सकती हैं, लेकिन इसके लिए पहल जरूर कर सकती हैं। मेट्रो सिटी की तर्ज पर ट्विनसिटी में भी कचरा लेने के लिए घर तक गाड़ी आती है, लेकिन उसके बाद भी शहर के कई हिस्सों में कचरा फैला हुआ मिलता हैं। महिलाओं को वेस्ट सामानों को लेकर पहल करनी होगी, ताकि उन्हें देख दूसरे भी सबक लें।
नालियां नहीं होंगी चोक
अगर कचरे को सही ढंग से डिस्पोज किया जाए तो नालियां चोक होने की समस्या आसानी से खत्म हो सकती है, इसके लिए जरूरी है कि मेडिकल वेस्ट की तरह कचरे को भी बांटा जाए, यानी पॉलीथिन बेस वाले कचरे को अलग डिस्पोज किया जाए और घर के अन्य कचरे को अलग फेंका जाए। लोग वेस्ट सामानों को फेंकने को लेकर सजग हो जाएं, तो गंदगी को काफी हद तक कम किया जा सकता हैं। घर से निकलने वाले कचरे को सही जगह पर डंप किया जाए, तो शहर की सुंदरता को चार चांद लगाए जा सकते हैं। राधिका नगर निवासी रेणु चौबे कहती हैं कि वह घर में होने वाले वेस्ट सामानों को जमीन के अंदर डाल देती हैं। उससे कहीं भी कचरा देखने को नहीं मिलता है। वेस्ट सामानों को जमीन में दबाने कई फायदे हैं। पहला तो शहर में कहीं कचरा देखने को नहीं मिलेगा और दूसरा वेस्ट समानों को कहां फें के, उसकी टेंशन भी खत्म हो जाएगी।
हो जाएगी रिसाइकिल
लोगों के द्वारा फेंके जाने वाले पॉलीथिन को एक जगह एकत्रित करके जमीन में दबा दिया जाए, तो कोई दिक्कत नहीं होगी। पॉलीथिन के बाहर फेंकने से पर्यावरण के साथ जानवरों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ता हैं। अक्सर लोग घरों में होने वाले कचरे को पॉलीथिन में डालकर बाहर फेंक देते हैं। साथ ही रद्दी कागज और किचन के वेस्ट सामानों को जमीन के अंदर डाल दिया जाए, तो न ही पर्यावरण पर बुरा असर पड़ेगा और न ही लोगों पर।
आउटर में होना चाहिए टेंचिंग ग्राउंड
ट्विनसिटी में कई जगह ऐसी हैं, जहां आपको कचरा दिख जाएगा। वैशाली नगर, राधिका नगर, जवाहर नगर, मौर्या टॉकीज चौक के पास कचरा दिखना आम है। कचरा फेंकने के लिए नगर निगम के द्वारा शहर के आउटर में खाली जगह है। वहां गाडिय़ों के माध्यम से कचरा फेंका जाता है। कुछ दिन रहने के बाद कचरे में आग लगाकर जला दिया जाता है। टेंचिंग ग्राउंड के शहर से दूर होने पर लोगों को गंदगी का सामना नहीं करना पड़ता है।
जागरुकता की कमी
घरों में होने वाले कचरे के लिए नगर निगम की ओर से गाडिय़ां चलाई जा रही हैं, लेकिन उसके बाद भी कई घरों के सामने कचरा पड़ा रहता है। लोगों में जागरुकता की कमी है। घर में होने वाले वेस्ट सामानों को किसी एक जगह एकत्रित करके रखें और गाड़ी आने पर उसमें डाल दें। अगर शहर के लोग ऐसा करते हैं, तो गंदगी से आसानी से निजात मिल जाएगी।
-निर्मला यादव, महापौर भिलाई नगर निगम
ये हैं फायदे
० शहर दिखेगा साफ और सुंदर
० नालियां नहीं होंगी चोक
० गंदगी से मिलेगा छुटकारा
० पर्यावरण रहेगा ठीक
ये हैं नुकसान
० मच्छरों से रहते हैं परेशान
० पॉलीथिन होती है घातक
० सुंदरता में आती है बाधा
० अक्सर नालियां हो जाती है जाम
० हर जगह सिर्फ दिखता वेस्ट
० पशुओं के निगल लेने से उनकी जान को खतरा

नहीं जानते संविधान को

सर्वे में हुआ खुलासा, सिर्फ ४० फीसदी स्टूडेंट्स रूबरू हैं सविधान से
शेखर झा
गणतंत्र दिवस का कौन सा वर्ष हैï? संविधान के कितने अनुच्छेद और अनुसूचियां हैं? संविधान में अब तक कितने संशोधन हुए हैंï? ऐसे ही कई सवालों से आज भी स्टूडेंट्स अनजान हैं। मंगलवार को जस्ट ट्विनसिटी के सर्वे में इसका खुलासा हुआ। जिसमें सिर्फ ४० फीसदी स्टूडेंट्स को अपने संविधान के बारे में जानकारी है। वहीं कई स्टूडेंट्स को तो ये तक नहीं पता कि इस बार गणतंत्र दिवस का कौन सा वर्ष है। हर साल की तरह इस बार भी ट्विनसिटी के स्कूलों और कॉलेजों में गणतंत्र दिवस की तैयारी चल रही हैं। जब स्टूडेंट्स से पूछा गया कि वे इस बार कौन-सा गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं, तो कुछ एक दूसरे का मुंह ताकते नजर आए तो कुछ अंगुलियों पर काउंटिंग करते। ऐसा नहीं है कि ये हाल कुछ स्टूडेंट या कुछ लोगों का है, लगभग यही हाल पूरे देश का है। लोगों को न तो अपने मौलिक अधिकारों के बारे में पता है और न ही संविधान के बारे में। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टूडेंट्स सिर्फ और सिर्फ अपनी रुचि के अनुसार ज्ञान अर्जित करते हैं। जिस तरह स्टूडेंट्स अपने स्कूल व कॉलेज के कोर्स को पूरा करने में कड़ी मेहनत करते हैं। उसी तरह उनको अपने संविधान के बारे में जानकारी अर्जित करनी चाहिए। उससे जानकारियां तो बढ़ेंगी ही साथ ही देश के संविधान से रूबरू भी होंगे।
६० फीसदी स्टूडेंट्स को नहीं है जानकारी
मंगलवार को जस्ट ट्विनसिटी ने शहर के स्कूलों व कॉलेजों में सर्वे किया। जिसमें संविधान संबंधित दस प्रश्न थे। जिसको स्टूडेंट्स ने हल किया। उसने पता चला कि ६० फीसदी स्टूडेंट्स को संविधान के बारे में जानकारी नहीं है। सर्वे में स्कूल व कॉलेज के ५० स्टूडेंट्स शामिल थे। जिसमें सिर्फ २० स्टूडेंट्स को ही संविधान की सही जानकारी थी।
जागरुकता की कमी
प्रिंसिपल एचएन दुबे ने बताया कि संविधान के बारे में स्टूडेंट्स तो अलग पेरेंट्स तक को जानकारी नहीं है। अगर पेरेंट्स को ही जानकारी नहीं है, तो स्टूडेंट्स को कहां से जानकारी रहेगी। एक तरह से कहा जा सकता है कि लोगों में जागरुकता की कमी है। स्टूडेंट्स अपनी रुचि के अनुसार सब्जेक्ट की तैयारी करते हैं। बहुत कम ही ऐसे स्टूडेंट्स रहते हैं, जो देश से जुड़ी जानकारियों को समय-समय पर प्राप्त करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट्स देश के मूल चरित्र के बारे में जानने की कोशिश ही नहीं करते हैं।
बनना होगा जिम्मेदार नागरिक
कुशाभाऊ ठाकरे जनसंचार एवं पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि सामाजिक आंदोलन की कमी है। स्टूडेंट्स देश के भविष्य हैं। सामाजिक आंदोलन से लोगों को संविधान के बारे में जानने को मिलेगा तो वे एक जिम्मेदार नागरिक बनने में सफल रहेंगे। उन्होंने कहा कि अधिकारों को लेकर लोग तो सतर्क हैं, लेकिन बात कर्तव्य की आती है, तो लोग पीछे हो जाते हैं। जिस तरह लोग अधिकारों को लेकर सतर्क हैं, उसी तरह कर्तव्यों के प्रति भी रहना चाहिए।
जाननी होगी अहमियत
शासकीय अधिवक्ता पुष्पा रानी पाड़ी ने बताया कि गणतंत्र दिवस को, तो लोग काफी खुशी से मनाते हैं, लेकिन उसके बारे में जानकारी एकत्रित नहीं करते हैं। अभी के स्टूडेंट्स सिर्फ और सिर्फ अपने अधिक माक्र्स और कॉम्पीटिशन एग्जाम को टारगेट करते हैं। कहा जा सकता है कि डॉक्टर, इंजीनियर बनने की होड़ में स्टूडेंट्स संविधान से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शासकीय और प्राइवेट स्कूल व कॉलेज की ओर से संविधान के प्रति स्टूडेंट्स को जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिएं। जिसके माध्यम से स्टूडेंट्स को संविधान के बारे में जानने का अवसर मिले।
सर्वे में हुआ खुलासा,
इस वर्ष कौन सा गणतंत्र दिवस मना रहे हैं?
३२त्न
भारतीय संविधान के निर्माता कौन हैं?
१००त्न
भारत का संविधान कब बनाया गया?
३२त्न
भारतीय संविधान को कब लागू किया गया?
१००त्न
राजपथ पर आयोजित कार्यक्रम में झंडा कौन फहराता है?
८०त्न
गणतंत्र दिवस पर कौन सा महत्वपूर्ण सम्मान दिया जाता है?
४४त्न
संविधान में कितने अनुच्छेद एवं अनुसूचियां हैं।
००त्न
गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजपथ पर कितनी तोपों की सलामी दी जाती है।
५६त्न
संविधान में मौलिक अधिकार किसे कहते हैं।
३६त्न
संविधान में अब तक कितने संशोधन हुए हैं।
००त्न
(नोट : सर्वे में अलग-अलग स्कूल-कॉलेजों के ५० स्टूडेंट्स से ये सवाल किए गए जिनका जबाव प्रतिशत में दिया गया है।)

हौसला अफजाई की दरकार

ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज पर जस्ट ट्विनसिटी बोली - सीनियर खिलाडिय़ों का एक साथ सन्यास भी अनुचित, नए खिलाडिय़ों को मिले पर्याप्त मौका
शेखर झा
आस्ट्रेलिया में टीम इंडिया की शर्मनाक हार के बाद सीनियर खिलाडिय़ों पर अंगुलियां उठनी शुरू हो गई हैं। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के साथ मिस्टर रिलायबल राहुल द्रविड़ और वैरी वैरी स्पैशल लक्ष्मण के खेल से सन्यास ले लेने के सुझाव आ रहे हैं। हर कोई भारतीय टीम को कोस रहा है, पर ट्विनसिटी के खेल प्रमियों को कहना है कि अभी टीम का हौसला बढ़ाने का समय है। टीम को ऑस्ट्रेलिया में त्रिकोणीय एक दिवसीय सीरीज खेलनी है। क्रिकेट प्रमियों का मानना है कि चयनकर्ताओं को सीनियर खिलाडिय़ों के साथ नए खिलाडिय़ों को पर्याप्त मौका देकर उन पर भरोसा जताना चाहिए। विराट कोहली इसके उदाहरण हैं। सीरीज के शुरूआत में फ्लॉप होने के बाद उन्होंने अद्र्धशतक और शतक जमाया। तीनों सीनियर खिलाडिय़ा के रिटायरमेंट के मुद्दे पर शनिवार को 'जस्ट ट्विनसिटीÓ ने शहर के क्रिकेटप्रेमियों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भले ही इंडिया टीम इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया टीम से लगातार ८ मैच हारी है, लेकिन यह वही टीम है जिसने घरेलू सीरीज में कंगारुओं को २-० से पराजित किया था। यह सही है कि सीनियर खिलाडिय़ों को अपने प्रदर्शन पर गौर करने का वक्त है पर सभी वरिष्ठ खिलाडिय़ों को एक साथ टीम से निकालना भी उचित नहीं होगा। चयनकर्ताओं की रणनीति में सुधार जरूरी है।
अंतर रहता है पिच का
इंडिया में फ्लैट ट्रेक हैं और विदेशों में बाउंसिंग। इंडिया टीम के खिलाड़ी फ्लेट ट्रेक पर अच्छा खेलते हैं, लेकिन उनको जैसे ही उछाल वाला पिच मिलता है, तो वह लडख़ड़ा जाते हैं। कहीं न कहीं टीम के हार के पीछे पिच का स्वभाव बड़ा कारण होता है। इंडिया टीम के खिलाडिय़ों को सभी तरह की पिचों पर खेलने का अभ्यास करना चाहिए।
- राजा बेनर्जी, क्रिकेट कोच
सीनियर प्लेयर्स जरूरी
क्रिकेट में कब कौन जीत जाए, किसी को पता नहीं रहता है, लेकिन विदेशी में लगातार दो सीरिज में इंडिया टीम को हार का सामना करना पड़ा। क्रिकेट पे्रमियों में नाराजगी देखने को मिल रही है और सीनियर खिलाडिय़ों को रिटायरमेंट लेने की बात कही जा रही है, लेकिन यह गलत हैं। जब तक टीम में सीनियर प्लेयर नहीं रहेंगे, तब तक नए खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे। सीनियर प्लेयर्स से जूनियर प्लेयर्स को बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
- मोहन दास, क्रिकेट प्लेयर
सलेक्शन सही नहीं
इंडिया टीम में ऐसे कई नए खिलाड़ी हैं, जिनको टेस्ट मैच में मौका नहीं दिया जा रहा हैं। एक तरह से कहा जा सकता है कि चयनकर्ताओं द्वारा टीम में खिलाडिय़ों का चयन ठीक से नहीं किया जा रहा है। जब तक सामने वाली टीम के अनुरूप इंडिया टीम के खिलाडिय़ों का चयन नहीं होगा, तब तक ऐसे ही इंडिया टीम को हार का सामना करना पड़ेगा।
- अमोल पन्ना, क्रिकेटप्रेमी
देना चाहिए नए खिलाडिय़ों को मौका
टीम में नए खिलाडिय़ों को पर्याप्त मौका नहीं दिया जा रहा। सीनियर खिलाड़ी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर चुके हैं। अब नए खिलाडिय़ों को भी परफोर्म करने का अवसर दिया जाना चाहिए। इससे खेल में परिवर्तन देखने को मिल सकता हैं।
- नीरज एक्का, क्रिकेटप्रेमी
बॉक्स
वीवीएस लक्ष्मण
उम्र -३७ वर्ष
टेस्ट मैच १३४
रन ८७८१
सर्वाधिक रन २८१
औसत ४५.९७
शतक १७
अर्धशतक ५६
आस्ट्रेलिया दौरा
टेस्ट मैच
रन १५५
सर्वाधिक रन ६६
औसत १९.३७
शतक
अर्धशतक
सचिन तेंदुलकर
उम्र - ३८
टेस्ट मैच १८८
रन १५४७०
सर्वाधिक रन २४८
औसत ५५.४४
शतक ५१
अद्र्धशतक ६५
आस्ट्रेलिया दौरा
टेस्ट मैच
रन २८७
सर्वाधिक रन ८०
औसत ३५.८७
शतक
अर्धशतक
राहुल द्रविड
उम्र- ३९
करियर
टेस्ट मैच १६४
रन १३२०८
सर्वाधिक रन २७०
औसत ५२.३१
शतक ३६
अर्धशतक ६३
आस्ट्रेलिया दौरा
टेस्ट मैच
रन १९४
सर्वाधिक रन ६८
औसत २४.२५
शतक
अर्धशतक

सोमवार, 23 जनवरी 2012

रायपुर कलेक्टर पर मेहरबान दुर्ग पुलिस

सीएसवीटीयू में फर्जीवाड़े की सुनवाई आज. एक साल से चल रही है पुलिस की जांच
नारद योगी
प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों को नियम-विरूद्ध संबद्धता, अनापत्ति प्रमाण पत्र, छात्रों को प्रवेश देने संबंधी फर्जीवाड़े अहम भूमिका निभाने वाले तकनीकी शिक्षा संचालनालय(डीटीई) के अधिकारियों पर दुर्ग पुलिस मेहरबान है। खासकर तत्कालीन काउंसिलिंग समिति के अध्यक्ष और वर्तमान रायपुर कलेक्टर डा. रोहित यादव पर। इसमें मामले में पुलिस ने डा. यादव से अब तक पूछताछ नहीं की है और नहीं उन्हें नोटिस जारी कर सफाई मांगी है। इससे साफ है कि पुलिस ने अब तक आईएएस अधिकारी को बचाने केे लिए जांच में पक्षपात किया। उल्लेखनीय है कि स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय(सीएसवीटीयू) में अनियमितता की जांच के दौरान डीटीई के अधिकारियों की भूमिका का भी खुलासा हुआ है। काउंसिलिंग समिति ने वर्ष २०१०-११ में बिना एनओसी और संबद्धता के ३० इंजीनियरिंग कॉलेजों को कांउसिलिंग में शामिल कर लिया। समिति के अध्यक्ष थे डीटीई के तत्कालीन संचालक डा. रोहित यादव और सदस्यों में डा. एमआर खान, जीएस बेदी और जीपी नायक शामिल थे। उल्लेखनीय है कि इस फर्जीवाड़े में सीएसवीटीयू के कुलपति और पूर्व रजिस्ट्रार सहित ३० से अधिक कॉलेज संचालक शामिल हैं। साथ ही अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद(एआईसीटीई) के चेयरमैन सहित अन्य अधिकारियों का नाम भी जुड़ा है।
बदली जांच की दिशा
२९ अक्टूबर २०११ को जांच अधिकारी संजय पुंढीर ने डीटीई के संचालक के सुब्रह्मण्यम धारा ९१ के तहत नोटिस जारी कर काउंसिलिंग संबंधी जानकारी मांगी। इसका जवाब पुलिस को ११ नवंबर को मिला। इसमें काउंसिलिंग समिति और बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र के शामिल होने वाले कॉलेज और उनके संचालकों के नाम थे। काउंसिलिंग समिति में डा. यादव का नाम आने के बाद पुलिस ने जांच की दिशा ही बदल दी। कांउसिलिंग समिति के अध्यक्ष होने के नाते फर्जीवाड़े के संबंध में पूछताछ करने की बजाय, जांच अधिकारियों ने मामले में उनका नाम ही नहीं जोड़ा। किसी भी जांच अधिकारी ने काउंसिलिंग समिति को जांच के दायरे में शामिल ही नहीं किया है।
फर्जीवाड़े का इन्हें मिला लाभ
शासकीय अधिकारियों द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करके बिना संबद्धता और एनओसी के काउंसिलिंग में शामिल करने का लाभ लेने वाले इंजीनियरिंग कॉलेजों के संचालकों में शरद शुक्ला, अतुल कुमार, डा. एमके कोवर, आईपी मिश्रा, किशोर भंडारी, सुशील चंद्राकर, डा. आर पुरुसवानी, डा. आईए खान, इतेश कुमार जंघेल, एमके अग्रवाल, निलेश देवांगन, नलिन लूनिया, गिरीश देवांगन, संजय बघेल, दीपक शर्मा, डा. लक्ष्मी सिंह धु्रव, बीएल खंडेलवाल, अतुल कुमार, डा. पीबी देशमुख, संजय रूंगटा, सोनल रूंगटा, सौरभ रूंगटा, प्रीति दावरा, विनय चंद्राकर, विजय जदवानी, सौरभ बरडिया, शैलेंद्र जैन, अजय प्रकाश वर्मा शामिल हैं। इन कॉलेज संचालकों ने छात्रों को अपनी संस्था में नियम-विरूद्ध प्रवेश दिया।
२२ वीं सुनवाई आज
सीएसवीटीयू में फर्जीवाड़े पर २२वीं सुनवाई सोमवार को डीजे अशोक कुमार पंडा के न्यायालय में होगी। अब तक तीन न्यायाधीशों के कोर्ट में २१ बार सुनवाई हो चुकी है। हर सुनवाई में पुलिस के विवेचना अधिकारी मामले की जांच को आगे बढ़ाने की बजाय, कोर्ट को उलझाने की कोशिश की। वर्तमान में तीसरे जांच अधिकारी दुर्ग सीएसपी रविंद्र उपाध्याय भी डीजे के पास पहले दिन उपस्थित नहीं हुए थे। उ
जांच अधिकारी गंभीर नहीं
इस हाईप्रोफाइल फर्जीवाड़े के आरोपियों को सजा तक पहुंचाने में पुलिस कितनी गंभीर है, इसका इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि नए जांच अधिकारी उपाध्याय ने केस डायरी को खोलकर अभी देखा भी नहीं है। इस संबंध में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि अभी इसे देख नहीं पाया हूं। इस संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं है।
सबूत है, तो जेल होगी
कानून के जानकारों का मानना है कि फर्जीवाड़े में भष्ट्राचार निवारण अधिनियम की धारा जुडऩे और साक्ष्य प्राप्त होने से आरोपियों की गिरफ्तारी तय है। इस संबंध में एंटी करप्शन ब्यूरो(एसीबी) के एएसपी मनोज खिलाडी ने बताया कि किसी को ट्रेस करने के दौरान उसके रंगे हुए हाथ, मौके पर मौजूद राशि आदि मिलने के कारण भष्ट्राचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत उसकी तत्काल गिरफ्तारी होती है। अगर किसी मामले में भष्ट्राचार निवारण अधिनियम लगा है और उसके दस्तावेजी साक्ष्य प्राप्त हैं, तो गिरफ्तारी होना तय है।

शुक्रवार, 20 जनवरी 2012

ट्विनसिटी के क्लबों का कल्चर

ट्विनसिटी में क्लब कल्चर उफान पर है। बच्चों से लेकर बड़े तक सभी किसी न किसी क्लब से जुड़कर समाजसेवा से लेकर अपनी हॉबी को पूरा कर रहे हैं।
शेखर झा
इंसान हर पल और हर वक्त कुछ न कुछ नया जरूर सीखता है। कभी वह अपने बड़े से तो कभी अपने से छोटे से। ऐसा ही कुछ ट्विनसिटी के लोग सीख रहे हैं। यहां वुमन्स क्लब, हैपी क्लब, लाफिंग क्लब, डांस क्लब सहित अन्य कई क्लब है, जहां लोग एंजाय के साथ-साथ सोशल वर्क भी कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि क्लब के माध्यम से बच्चों से लेकर बड़ों तक को प्लेटफार्म मिलता है। इतना ही नहीं अब तो अलग-अलग समाज में भी प्रतिभा को निखारने कई कार्यक्रम होने लगे हैं। क्लबों की ओर कभी डांस कंपीटिशन तो कभी समाजिक कार्य करने को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। शहर में कई क्लब ऐसे हैं जो अपने कार्यों को लेकर सम्मानित भी हो चुके हैं। क्लब के सदस्यों का कहना है कि बच्चे पढ़ाई और महिलाएं अपने घरों के काम में व्यस्त होने के कारण कई बार अपनी प्रतिभा को निखारने से वंछित रह जाते हैं, ऐसे में अगर
वे किसी कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं तो न सिर्फ उन्हें पहचान मिलती है बल्कि नई चीजों की जानकारी भी मिलती है।
यूथ के लिए भी क्लब
ट्विनसिटी में वुमन्स क्लब्स के साथ साथ यूथ के लिए भी क्लब है। जिसमें स्कूल और कॉलेज के स्टूडेंट जुड़े हुए हैं, जो समय समय पर स्टूडेंट्स के लिए स्पर्धाओं का आयोजन करते हैं, ताकि स्कूल में रहते हुए स्टूडेंट्स को प्लेटफार्म मिल सके। फिर चाहे वह क्वीज कंपीटिशन हो या ड्राइंग, पेटिंग या फिर स्टेज परफार्मेंस।
हंसने के लिए बना क्लब
लाफिंग क्लब के अध्यक्ष त्रयम्बक शर्मा ने बताया कि पंद्रह साल पहले उन्होंने अपने दोस्त के साथ मिलकर लाफिंग क्लब की शुरुआत की। क्लब का उद्देश्य यह है कि लोगों को हर समय हंसते हुए देखना। वे कहते हैं कि बिजी लाइफ में लोगों को अलावा टेंशन के कुछ नहीं मिलता, इसलिए उन्होंने केवल हंसने के लिए क्लब बनाया। क्लब में पहले उन्होंने कार्टून के माध्यम से लोगों को हंसाने का काम किया अब यह क्लब साल में एक बार शहर के लोगों को हंसाने के लिए बड़े पेमाने पर कार्यक्रम आयोजित करता है। क्लब के कार्य को देखकर २००८ में सम्मानित भी किया जा चुका है। इतना ही नहीं क्लब में देश के बाहर के लोग भी बतौर सदस्य शामिल है।
तुरंत मदद को तैयार
लायंस क्लब भिलाई के अध्यक्ष विपिन बंसल ने बताया कि ट्विनसिटी में ऐसी कई संस्था हैं जो सांस्कृतिक कार्यक्रम, गेम व अन्य स्पर्धाओं का आयोजन करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि लायंस क्लब भी सांस्कृतिक कार्यक्रम, बच्चों व महिलाओं के लिए विभिन्न स्पर्धाओं का समय समय पर आयोजन करता है, लेकिन यह संस्था सभी संस्थाओं से हट कर कुछ अन्य काम भी करती है और वह है तुरंत मदद करो। इस अभियान के तहत संस्था के लोग कमजोर व असहाय लोगों के साथ सड़क दुघर्टना के वक्त मदद, रक्तदान जैसे कार्य तत्काल करते हैं ताकि प्रभावितों को तुंरत उपचार के साथ लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि कई बार सड़क दुघर्टना में घायल लोगों को मदद न मिल पाने के कारण अपनी जान गंवानी पड़ती है। उन्होंने बताया कि जब से यह अभियान शुरू हुआ है तब से यह संस्था कई लोगों की मदद कर चुकी है।
दिया हाथों को काम
नूतन संगवारी महिला जन कल्याण समिति पिछले ७ सालों से कमजोर व असहाय महिलाओं के लिए रोजगार दिलाने का काम कर रही है। समिति की अध्यक्ष अनिता अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान समय में कम पढ़ी-लिखी महिलाओं को रोजगार नहीं मिल पाता है, ऐसे में समिति ने २२ से २५ महिलाओं को भिलाई-दुर्ग में रोजगार दिया है। उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य ही यही है कि जिन लोगों को रोजगार नहीं मिल पाता है उनकी मदद करना। समिति की ओर से कामकाजी महिलाओं के मनोरंजन के लिए सांस्कृतिक व विभिन्न स्पर्धाओं का आयोजन किया जाता है। ताकि महिलाओं को काम के बीच में भी एंजाय करने का मौका मिल सकें।

डाउनलोडिंग जरा संभलकर

इन दिनों फोटो डाउनलोडिंग के जरिए वायरस आईडी हैक होने के मामले सामने आ रहे हैं। इसे बाइंडर प्रोग्राम नाम दिया गया है। इस प्रोग्राम के माध्यम से फोटो अपलोड करने के साथ वायरस एक्टिव हो जाता है और इससे आपका आईडी हैक किया जा सकता है। शेखर झा :-
केस-१
सेक्टर-६ निवासी दीपक साहू ने ३ सितंबर को अपने दोस्त के फेसबुक आईडी से एक हॉलीवुड हीरोइन की फोटो को शेयर किया। शेयर करने के कुछ देर बार अचानक कम्प्यूटर बंद हो गया और फिर सिस्टम काफी धीरे चलने लगा। उसने अपनी आईडी को फिर से खोला तो आईडी हैक हो चुकी थी।
चेंज हुआ फोटो
केस-२
स्मृति नगर निवासी संतोष सिंह ने ५ सितंबर को डेस्कटॉप के लिए एक बॉलीवुड हीरोइन के फोटो को डाउनलोड किया। फोटो के डाउनलोड होने तक किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हुई और उन्होंने उस फोटो को डेस्कटॉप पर शेव कर लिया। जब उन्होंने दोबारा सिस्टम खोला, तो उनका डेस्कटॉप का फोटो चेंज हो गया था।
युवा इन दिनों सोशल नेटवर्किंग पर ज्यादा समय बिता रहे हैं। इस दौरान युवा फोटो को दोस्तों के साथ शेयर करने के लिए मेल में अपलोड करते हैं और इसी अपलोडिंग के दौरान आपकी आईडी हैक हो जाती है। हालांकि आईडी के हैक होने का पता युवाओं को तुरंत नहीं चल पाता है, लेकिन कुछ समय बाद आईडी अपने आप बंद हो जाती है। कुछ ऐसा ही ट्विनसिटी के रमेश देवांगन के साथ पिछले दिनों हुआ। वह दोपहर के समय अपने फे सबुक अकाउंट पर बॉलीवुड व हॉलीवुड के एक्टर्स का फोटो अपलोड कर रहे थे। शाम को जब उन्होंने फेसबुक पर साइन इन करना चाहा तो पता चला कि उसका पासवर्ड सही नहीं है। किसी ने उसकी आईडी हैक कर ली। ट्विनसिटी में हो रही इस तरह की घटनाओं को देखते हुए सोशल नेटवर्किंग के यूज करने वालों को सजग होना होगा। वहीं शहर के आईटी के जानकारों का मानना है कि कई बार युवा अच्छी फोटो देखकर उसको अपनी आईडी के साथ शेयर करने की कोशिश करते है, लेकिन उनको यह पता नहीं रहता है कि फोटो शेयर करने से आईडी हैक हो सकती है।
हर फोटो न करें अपलोड
इस तरह की समस्या उन लोगों को आ रही है जो फेसबुक या फिर कोई अन्य सोशल नेटवर्किंग साइट का इस्तेमाल कर रहे हैं। अच्छे फोटो अपलोड करना कुछ लोगों की आदत में शुमार होता है। किसी भी सर्च इंजन से फोटो सर्च करने के बाद वह डाउनलोड कर लेते हैं और इसे फेसबुक में अपलोड कर देते हैं, लेकिन हम ये नहीं जानते कि यह फोटो कम्प्यूटर के साथ ही साथ आपके फेसबुक अकाउंट को नुकसान पहुंचा सकता है।
की-लॉगर्स देता है सारी जानकारी
साइबर एक्सपर्ट सनी वाघेला ने बताया बाइंडर प्रोग्राम के साथ ट्रोजन वायरस होता है। इंटरनेट से फोटो डाउनलोड करने पर यह कम्प्यूटर में एक्टिव हो जाता है। वह उस सिस्टम पर होने वाली सारी एक्टिविटी की जानकारी हैकर को देता रहता है। इसमें होने वाले की-लॉगर्स के कारण की-बोर्ड, माउस से हम जो भी इनपुट करते हैं वह जानकारी हैकर्स तक पहुंचाता है। जब हम किसी भी सोशल नेटवर्किंग साइट पर साइन इन करते हैं तो हैकर हमारा पासवर्ड जान उसे हैक कर सकता है। इसे एंटी वायरस भी स्कैन नहीं कर पाता।
ऐसे बच सकते हैं हैकिंग से
लाइसेंस वाले एंटी वायरस का ही उपयोग करें।
डाउनलोडिंग के बाद सिस्टम का सेटअप चेककर लें कि कहीं उसमें अनजान प्रोग्राम तो रन नहीं हो रहा है। ऐसा हो रहा है तो एक्सपर्ट से सलाह लें।
फोटो डाउनलोड कर रहे हैं उसकी बेसिक इंफोर्मेशन की जांच कर लें।
ई-मेल पर आने वाले अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
अच्छी फोटो को देखकर अपलोड या डानउलोड न करें।
हैक हुई आईडी

बढ़ा पुरानी बाइक का क्रेज

शेखर झा
शौक को पूरा करने के लिए युवा क्या नहीं करते हंै। इन दिनों ट्विनसिटी के युवाओं को पुरानी बाइक भा रही है। वो भी क्यों नहीं। क्योंकि महंगी गाड़ी कम रेंज में उपलब्ध है। वहीं युवाओं को देखें तो कोई प्लसर तो कोई एवेंजर चलाना शौकिन रखते हंै। उन शौक को पूरा करने के लिए युवा सकेंड हैंड बाइक की खरीदी ज्यादा कर रहे है। शहर के कई जगहों पर पुरानी बाइक मिल रहे हंंै। उन बाइक दुकान में इन दिनों युवाओं की भीड़ सुबह से शाम तक देखने को मिल रहा है। उस दुकान में सभी तरह की गाड़ी व कंडिशन फिट बाइक मिल रहा है। पुरानी गाड़ी की खरीदी करने के बाद युवा अपने मन मुताबिक उसका मौडीफाई कराकर फिर बाइक चलाते है।
शौक होता है पूरा
मध्यम वर्ग वाले महंगी गाड़ी खरीदी करने में असमर्थ रहते है। क्योंकि उनके पास पर्याप्त रकम नहीं रहता है। और इंश्योरेंश के चक्कर में न पडऩे के कारण पुरानी बाइक की खरीदी कर लेते है। वहीं शहर में इस सुविधा के उपलब्ध होने से सभी वर्ग के युवा अपने मन मुताबिक बाइक खरीदी करने का अवसर मिल जाता है।
रहता है रेंज कम
इन दिनों तो कोई भी बाईक चालीस से पैतालीस हजार से कम में नहीं मिल रही है। अगर इंश्योरेंस पर नई बाईक लेते हंै तो बाईक के दाम के अलावा और दो से चार हजार रुपए देना पड़ता है। उन सभी को देखते हुए युवा पुराने बाइक की खरीदी ज्यादा कर रहे है। कई बार ऐसा भी होता है कि उन दुकानों पर लोगों को चार से पांच महीने चली गाड़ी भी उपलब्ध हो जाती है।
चेक करे फिर ले गाड़ी
अगर आप पुरानी गाड़ी की खरीदी कर रहे है तो खरीदी करने से उस गाड़ी के कागजात की पूरी तरह से जांच पड़ताल कर लें। साथ ही गाड़ी के इंजन, बॉडी व अन्य सभी चीजों के बारे में बारीकी से जांच कर लें। उसके बाद ही गाड़ी की खरीदी करें। साथ ही कई गाडिय़ा ऐसी भी रहती है जो आए दिन बिगड़ती रहती है। गाड़ी लेने से पहले किसी जानकार व्यक्ति से उस गाड़ी की चेकअप करा लें।
यहां मिल रही है गाड़ी
कुछ साल पहले पुरानी बाइक की खरीदी करने के लिए लोगों को दूसरे प्रदेश या राजधानी रायपुर जाना पड़ता था। मगर अब लोगों को शहर मे कई ऐसे जगह हैं जहां पुरानी बाइक उपलब्ध है। शहर के महात्मा गांधी चौक, तीन दर्शन मंदिर व अन्य कई जगहों पर पुरानी बाइक मिल रही है। उन दुकानों में लोगों को कम से कम रेंज पर मिल रहा है।

परदेस में हैं मेरे भईया

पूजा पटेल
राखी रेशम की डोर से बंधा एक पवित्र रिश्ता है। इस रिश्ते में अटूट प्यार छुपा है। राखी के अटूट बंधन को लेकर सदियों से कई गाथाएं चली आई हैं। द्रौपदी ने अपनी रक्षा के लिए भगवान कृष्ण को राखी बांधी थी और सदियों से ये रक्षा सूत्र वीर योद्धाओं की कलाई पर बंधता आया है और बंधता रहेगा चाहे भाई पास हो या दूर। भाई कि कलाई में बंधने वाला धागा बहुत अहम होता है, जहां बहन भाई की रक्षा के लिए यह रक्षा सूत्र बांधती है वहीं भाई भी बहन की रक्षा का वचन देता है। जब भाई किसी वजह से घर से दूर चला जाता है और राखी पर घर नहीं आ पाता है, तो बहन अपने अरमानों को रेशम की डोरी से सजाकर प्यार का अटूट बंधन भेज देती है बंद लिफाफे में।
बचपन के छोटे-मोटे झगड़े और पल में मिल जाना एक दूसरे से रुठना-मनाना सब कुछ दूर भले है पर सभी को यादों और तस्वीरों में समेटकर रखा हुआ है। बहन का मन तो करता है कि कोई जादू की छड़ी होती तो उस पल को वापस ले आती। इन यादों को याद कर कभी-कभी आंखों में आंसू भी आ जाते हैं पर भाई की बढ़ती प्रगतियों को देखकर अरमानों को मन के अंदर ही दबा लेती हैं, जब वह भाई को राखी के साथ पत्र भेजती हैं तो लिख देती हैं यहां सब कुशल है पर सच तो कुछ और ही होता है। और राखी भेजते समय बस यही सोचती हैं कि क्या हुआ जो राखी मेरे हाथ से न बंध पाई पर इस राखी में मेरी दुआएं और प्यार छुपा है, जिसे भले ही भाई तुम खुद अपने हाथों से बांधो पर ये राखी जब तक बंधी रहेगी मेरी दुआओं और प्यार का एहसास दिलाती रहेगी। ट्विनसिटी में भी ऐसी कई बहन हैं जो कई वर्षों से दूर देश में रह रहे अपने भाई रक्षा सूत्र भेज रही हैं।
सात संमदर पार है भाई
देशमुख परिवार बोरसी दुर्ग के सबसे छोटे बेटे श्रीकांत देशमुख पिछले १५ वर्षों से अमेरिका मे रह रहे हैं। वे ब्यूनस आयरस में इंडियन कपड़ों का बिजनेस करते हैं। इस दौरान वे सिर्फ २ राखियों पर ही अपनी बहन से मिल पाए हैं। सुमन वर्मा बताती हंै कि पिछली राखी पर तीनों भाई साथ थे। इस बार वे नहीं आ रहे हैं, इसलिए वे राखी पोस्ट कर रही हैं। सुमन भाई को याद करते हुए कहती हैं कि भाई और उनक ी बहुत लड़ाई होती थी पर प्यार भी उतना ही ज्यादा था। कभी उन्हें भईया नहीं बुलाया एक बार भईया बुलाया तो कहने लगे तू मुझे नाम से ही बुलाया कर। सुमन बताती है कि श्रीकांत भईया मेरी राखी सालभर तक बांध कर रखते हैं। ३ भाई और ३ बहनों में दोनों बड़ी बहन सोभा व सुम्मति भी अमेरिका में रहती हैं जो इंडिया में रह रहे दो भाइयों संजय व विवेक के लिए अपने हाथों से बनी राखी भेजती हैं।
बहुत मिस करती हंू
दुर्ग शंकर नगर की गीता टांक भी अपने दोनों भाईयों को राखी भेजती हैं। गीता ने अपनी पसंद की राखी अपने भाइयों को पोस्ट भी कर दी है। दोनों भाई तिपेश और देवेन्द्र इंजीनियर हैं व जॉब के चलते हैदराबाद व गुणगांव में रह रहे हैं। गीता राखी पर अपने भाइयों को बहुत मिस करती है। गीता कहती है कि छोटा भाई देवेन्द्र बहुत शरारती है हम दोनों भाई-बहन स्पेशल ओकेशन पर किचन में कुछ न कुछ बनाते थे। तिपेश भाई के साथ तांगे में मार्केट से घर आने की बहुत सी यादे हैं। जॉब के चलते दोनों भाई राखी पर नहीं आ पाते पर दिवाली में दोनों भाई ढेर सारे गिफ्टों के साथ आकर सारी कसर पूरी कर देते हैं।
जिद्दी है पर सबका लाडला भी
गौतम परिवार दुर्ग के सबसे छोटे बेटे भावेश गौतम सब इंसपेक्टर हैं, जिनकी पोस्ंिटग दंंतेवाड़ा है। ६ बहनों अदिती, ज्योति, छमा, रमा, बिंदू, गायत्री का यह सबसे छोटा भाई सबका लाडला है। दंतेवाड़ा पोस्ंिटग की वजह से पिछले दो वर्षों से राखी पर नहीं आ पाया है। इसलिए सभी बहनें अपनी पसंद की राखियां भाई को पोस्ट कर रही हैं। बहनों का कहना है कि भाई सबसे छोटा होने की वजह से थोड़ा जिद्दी है पर सबसे जिम्मेदार भी है राखी में भाई को सारा परिवार बहुत मिस करेगा। बहन ज्योति बताती हैं कि भाई को दिवारों पर अपना नाम लिखने का बहुत शौक था इसी शैतानी के चलते उसे डांट पड़ती थी उसकी ये शैतानी याद कर हम सब बहनें आज भी हंस पड़ती हैं।

नेता जी सुभाष चंद्र बोस की ऐसी दुर्गति देखी नहीं होगी आपने!

ब्रज किशोर दुबे
देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए भारत के नौजवानों को आजादी की लड़ाई में कुदने को प्रेरित करने के लिए तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे अजादी दूंगा का नारा देने वाले नेताजी को आजादी के महज 64 साल ही बीतने पर हमलोगों ने उन्हें भूला दिया।
याद में महज खानापूर्ति
जन्म तिथि 23 जनवरी को या पूर्णतिथि 18 अगस्त को याद कर महज खानापूर्ति कर देते है। नहीं तो यह दृश्य देखने को नहीं मिलती। आरा के रमना मैदान के पूर्वी कोने व महिला कॉलेज रोड़ पर स्थित उनकी प्रतीमा का हाल देख कर आँखे शर्म से झुक जाती है। ऐसा नहीं कि यह दृश्य अकेले मुझे देखने को मिली। इस रोड़ से शहर के तमाम सरकारी बाबूओं से लेकर समाज के बुद्धिजिवि नागरीकों का आना-जाना लगा रहता है। शहर के महत्वपूर्ण होटल इसी रोड़ पर स्थित है, महज 100 मीटर की दूरी पर सिविल कोर्ट और 10 मीटर दूरी पर शहर का सबसे महत्वपूर्ण सभागार नागरी प्रचारणी है, तो 5 मीटर की दूरी पर भीमार्ट मौल है।
नेताजी की वीरगाथा
23 मार्च 1897 को उडिसा के कटक में जन्म लेने वाले सुभाष चंन्द्रबोस विचारों से प्रभावित होकर जर्मनी के शासक हिटलर ने नेताजी कह कर संबोधित किया। यही नहीं राष्ट्रपिता महात्मागांधी के बुलाने पर कांग्रेस के अधिवेशन में भाग लेने वाले राष्ट्रभक्त नेजाजी ने 1938 और 1939 में कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किये गये। लेकिन नेताजी ने माना कि अंग्रेजों से भारत को अजाद कराने के लिए अहिंसा का रास्ता छोडऩा होगा। इस विचार को मूर्त रूप देने के लिए 17 जनवरी 1941 नेताजी जपान की यात्रा पर चले गये। 21अक्टूबर 1943 ई. को उन्होंने ने जपान सरकार के सहयोग से सिंगापुर में अजाद हिन्द फौज सरकार का गठन किया। जो भारत के पूर्वी भागों पर हमला कर भारत की जमी को अंग्रेजो से मुक्त कराया। इसी दौरान माना जाता है कि 18 अगस्त 1945 वायुयान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। तब से लेकर आज तक उनकी मृत्यु कब और कहाँ हुई यह जांच का विषय ही रह गया है।

गुरुवार, 19 जनवरी 2012

वेबसाइट से फैकल्टी संबंधी आर्डनेंस गायब

सीएसवीटीयू में चयन समिति बनाने में गड़बड़ी, एआईसीटीई के मापदंडों का नहीं होता पालन, इंजीनियरिंग कॉलेज संचालक करते हैं मनमानी
नारद योगी
प्रदेश में स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय(सीएसवीटीयू) की स्थापना इंजीनियरिंग शिक्षा के विकास के लिए की गई थी। पिछले कुछ वर्षों में यूनिवर्सिटी में जिस तरह के फर्जीवाड़े और अनियमितताएं हुई हैं, उससे तकनीकी शिक्षा का विकास कम व्यवसायीकरण ज्यादा हुआ है। कॉलेज संचालकों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए यूनिवर्सिटी ने संबद्धता, प्रवेश में फर्जीवाड़ा के अलावा फैकल्टी चयन में भी कोई पारदर्शिता नहीं बरती। इसका सबूत है सीएसवीटीयू की वेबसाइट से फैकल्टी चयन के लिए बनी आर्डिनेंस-१९ का गायब होना। यूनिवर्सिटी के अधिकारियों के मुताबिक फैकल्टी की नियुक्ति आर्डिनेंस-१९ में निर्धारित नियमों के अनुसार गठित चयन समिति के माध्यम से की जाती है, लेकिन वेबसाइट में आर्डिनेंस-१९ में चयन समिति की जगह एमबीए पाठ्यक्रम में प्रवेश संबंधी जानकारी दी गई है। इससे अधिकारियों के बयान की सच्चाई का पता चलता है। यूनिवर्सिटी से संबंधित २२ आर्डिनेंस वेबसाइट पर हैं। इनमें से फैकल्टी चयन संबंधी प्रक्रिया का एक भी नहीं है। इससे साफ है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन फैकल्टी नियुक्ति प्रक्रिया के बारे में बताना नहीं चाहता। सूत्रों के मुताबिक यूनिवर्सिटी की स्थापना से लेकर अब तक फैकल्टी चयन में कॉलेज संचालकों को पूरी छूट दी गई। और अखिल भारतीय तकनीकी परिषद(एआईसीटीई) के नियम के विपरीत फैकल्टी चयन किया गया। यही वजह है कि फैकल्टी चयन संबंधी आर्डिनेंस को वेबसाइट डाला नहीं गया है।
क्या है आर्डिनेंस-१९
विश्वविद्यालय अधिनियम १९७३ के अनुसार देश भर में विश्वविद्यालय स्थापित किए जाते हैं। इन्हें संचालित करने के लिए संबंधित राज्य शासन विवि अधिनियम १९७३ का पालन करते हुए अध्यादेश जारी करती है। इन्हीं से विश्वविद्यालाय संचालित होते हैं। सीएसवीटीयू के लिए भी छगविवि अधिनियम बनाया गया है। इसके तहत अनेक आर्डिनेंस बनाए गए हैं। इनमें से आर्डिनेंस-१९ सीएसवीटीयू से संबद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजों में फैकल्टी की नियुक्ति करने के लिए चयन समिति बनाने के बारे में बताता है। समिति का गठन व फैकल्टी के चयन में आर्डिनेंस में दिए दिशा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक होता है।
सीएसवीटीयू के २२ आर्डिनेंस
यूनिवर्सिटी के कामकाज के लिए २२ आर्डिनेंस बनाए गए हैं। आर्डिनेंस नंबर -१ में इंजीनियरिंग कॉलेजों को संबद्धता देने, २ में छात्रों के कॉलेजों में प्रवेश, यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट, छात्रों के ट्रांसफर प्रक्रिया आदि, ३ में विभिन्न फैकल्टी डिपार्टमेंट, ४ में छात्रों का नामांकन, ५ में परीक्षा आयोजन, ६ में परीक्षा संबंधी, ७ में फैलोशिप व स्कालरशिप, ८ में परीक्षा फीस, ९ मेें परीक्षकों को टीए व डीए संबंधी, १० में पीएचडी, ११ में रिसर्च के द्वारा आर्किटेक्चर में मास्टर डिग्री, १२ में एमई व एमटेक के बारे में, १३ में फुल टाइम एमसीए कोर्स, १४ में बीई में पीजी, १५ में पांच वर्षीय बीआर्क, १६ में बी फार्मा, १७ त्रिवर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम, १८ में फार्मेसी में दो वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम, १९ में एमबीए पाठ्यक्रम, २० में पार्ट टाइम बीई पाठ्यक्रम, २१ में पार्ट टाइम इंजीनियरिंग में डिप्लोमा और २२ में एप्लाइड जियोलॉजी में मास्टर डिग्री संबंधी जानकारी हैं।
चयन समिति के सदस्य
यूनिवर्सिटी की फैकल्टी चयन समिति में कुलपति या उनका प्रतिनिधि, दो विषय विशेषज्ञ और संबंधित इंजीनियरिंग कॉलेजों के सोसाइटी अध्यक्ष शामिल होते हैं। सूत्रों के मुताबिक ऐसे कई मामले हैं, जिनमें जिस विषय की फैकल्टी के चयन के लिए साक्षात्कार कार्यक्रम आयोजित किया जाता था, उस चयन समिति में संबंधित विषय के विशेषज्ञ शामिल नहीं होते थे। सिविल वालों के चयन समिति में मैकेनिकल वाले और मैकेनिकल वालों के लिए बनी चयन समिति में इलेक्ट्रीकल के विशेषज्ञ शामिल होते थे।
वर्सन
फैकल्टी चयन में पूरी पारदर्शिता बरती जाती है। नियुक्तियां पहले की हैं। वर्तमान में एआईसीटीई के नियमों के अनुसार चयन किया जाएगा। आर्डिनेंस की जांच की जाएगी।
-डॉ अशोक कुमार दुबे, रजिस्ट्रार, सीएसवीटीयू, भिलाई

शनिवार, 14 जनवरी 2012

कम पानी है बीमारी की जड़

ट्विनसिटी में बढ़ रही है कम पानी पीने वाले मरीजों की संख्या
गर्मी में लोग पानी खूब पीते हैं, लेकिन जैसे ही ठंड आती है लोग पानी कम पीना शुरू कर देते हैं, जिससे शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाती है और यही कारण उनकी बीमारी का सबब बन जाता है। ट्विनसिटी में भी ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है जो कम पानी पीने की वजह से बीमार पड़ रहे हैं।
शेखर झा
ठंड में ज्यादा पानी पीना फायदेमंद है, लेकिन ठंड की वजह से लोग ज्यादा पानी नहीं पी पाते हैं। चिकित्सक बताते हैं कि कम पानी पीने वालों में कामकाजी व यंगस्टर्स की संख्या ज्यादा है। क्योंकि सुबह से शाम तक ऑफिस और स्कूल-कॉलेज के चलते वे कम पानी पीते हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है और इससे पेट में दर्द, जलन, किडनी में तकलीफ व अन्य तरह की दिक्कतें होनी शुरू हो जाती हैं। इन दिक्कतों से खुद को दूर रखने के लिए लोगों को शरीर के अनुसार पर्याप्त पानी पीना चाहिए। डॉक्टर्स का मानना है कि ज्यादातर शहरवासी शरीर के लिए आवश्यक मात्रा से कम पानी पी रहे हैं, जिससे उनके शरीर में एसिडिटी, चमड़ी में सूखापन, बालों में डेंड्रफ सहित किडनी की समस्या बढ़ रही है। एक्सपर्ट की मानें तो सर्दी हो या बारिश रोज दो लीटर और गर्मी में पांच लीटर पानी पीना ही चाहिए।
रोज आते हैं पांच मरीज
ठंड का सीजन जैसे ही आता है, वैसे ही हॉस्पिटल में पानी कम पीने से होने वाली बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या बढऩे लगती है। शासकीय अस्पताल में प्रत्येक दिन एसिडिटी, पेट में दर्द और जलन, उल्टी-दस्त बीमरियों से ग्रसित औसतन ५ मरीज आ ही जाते हैं।
हो सकता है स्टोन
सुपेला स्थित शासकीय हॉस्पिटल के प्रभारी गोपीनाथ ने बताया कि अगर शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिला, तो पथरी होने डर रहता है। उन्होंने कहा कि ठंड में कम से कम लोगों को दो लीटर पानी पीना चाहिए। जिससे पथरी होने का डर नहीं रहता है। शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी मिलेगा, तो किसी भी तरह की बीमारी नहीं होगी। साथ ही उन्होंने लोगों को ठंड में गुनगुना पानी पीने की सलाह दी।
जानें कितना जरूरी पानी
डॉक्टर्स का मानना है कि अगर आप शरीर में पानी की पर्याप्ता मात्रा को जानना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपना वजन तौल लें। उसके बाद अपने वजन को तीस से विभाजित कर दें। यदि वजन ६० किलोग्राम है तो इसे तीस से भाग देने पर २ आएगा। यदि आपका वजन ७५ किलोग्राम है तो उत्तर २.५ आएगा। इस तरह आप अपने वजन को ३० से भाग दें और जो भी उत्तर आए उतना ही पानी पिएं।
होता है नियंत्रण
० खाना खाने से आधा घंटा पूर्व और एक घंटा बाद तक पानी नहीं पीना चाहिए।
० दिनभर में अधिक से अधिक पानी पिएं।
० पानी पीने से वजन पर भी नियंत्रण में रहता है।
० पानी को फिल्टर करके या उबाल कर ही पिएं, क्योंकि दूषित पानी से लीवर और गुर्दों के रोग हो जाते हैं।
० पानी पीने में यदि परेशानी होती है, तो पानी का संतुलन शरीर में बनाए रखने के लिए अच्छी मात्रा में फल खाएं।

मुन्नी, शीला के बाद चमेली की बारी

पव्वा भले ही चिकनी चमेली ने चढ़ाया हो, लेकिन इसका नशा हर किसी के सिर चढ़कर बोल रहा है। मोबाइल से लेकर लेपटॉप, टीवी से लेकर यू-ट्यूब तक चिकनी चमेली के प्रशंसक देखने को मिल रहे हैं। फिल्म के आने से पहले ही यह गाना इतना हिट हो गया है, कि हर तरफ चिकनी चमेली की चर्चाएं सुनने को मिल रही हैं। श्रेया घोषाल की आवाज से कहीं ज्यादा कैटरीना कैफ की अदाओं ने गाने को इस कदर मशहूर कर दिया है कि लोकप्रियता की लिस्ट में यह सबसे ऊपर है।
शेखर झा
पहले मुन्नी फिर शीला और अब चिकनी चमेली लोगों के जुबां पर छा गई है। शहर के टॉकीजों में कुछ दिनों के बाद अग्निपथ की रीमेक लगने वाली है। वहीं इस फिल्म का गाना चिकनी चमेली ट्विनसिटी में धूम मचा रहा है। इस गाने पर बॉलीवुड की बॉर्बी डॉल कैटरीना कैफ की अदाओं ने लोगों का एक अर्से बाद दिल जीता है। गली-मोहल्ले से लेकर लोगों के जुबां तक सिर्फ इसी गानें की धुन सुनने को मिल रही है। इस गाने को यू-ट्यूब पर लाखों लोग देख चुके हैं।
कोंबड़ी पलाली का रीमेक
आने वाली फिल्म 'अग्निपथ में चिकनी चमेली सॉन्ग मराठी फिल्म 'जात्र का गाना कोंबड़ी पलाली का रीमेक है। जिस कदर लोगों को चिकनी चमेली भा रही है। उसी तरह महाराष्ट्र में कोंबड़ी पलाली सॉन्ग लोकप्रिय है। चिकनी चमेली और कोंबड़ी पालाली गाने में बस बोल का फर्क है, वहीं डांस, म्यूजिक व अन्य सभी चीजें करीबन एक जैसी हैं।
पब्लिसिटी का फंडा
पुरानी फिल्मों में एक भी आइटम सॉन्ग नहीं हुआ करता था। क्योंकि पहले इसे संस्कृति से परे माना जाता था। वहीं इन दिनों सभी को लटके-झटके ज्यादा पसंद आते हैं। इसलिए फिल्म मेकर आइटम सॉन्ग के जरिए ज्यादा पब्लिसिटी करते हैं।
श्याम सोनी, फिल्म प्रेमी
नहीं देख सकते फैमिली के साथ
वर्तमान में आने वाली फिल्म और उसके सॉन्ग को फैमिली मेम्बर के साथ बैठकर नहीं देख सकते हैंं, क्योंकि उसमें अश्लीलता कुछ ज्यादा ही दिखाई जाती है। फिल्म डायरेक्टर फिल्म प्रेमियों के च्वाइस के अनुसार ही फिल्म को क्रिएट करते हैं और उसके बाद प्रसारित करते हैंं।
नरेश कुमार, फिल्म प्रेमी

स्टूडेंट्स जुटे एग्जाम के फाइनल टच में

जहां एक ओर स्टूडेंट्स १२वीं परीक्षा को फाइनल टच देने में जुट गए हैं, वहीं कुछ एआईईईई की तैयारी में अभी व्यस्त हो गए हैं। १२वीं परीक्षा के होने के बाद एआईईईई के लिए स्टूडेंट्स के पास लगभग एक महीना बच जाएगा। उसमें अच्छे से एग्जाम का प्रीप्ररेशन कर सकेंगे। २०११ में संपन्न हुए एआईईईई परीक्षा में छत्तीसगढ़ से लगभग २४ हजार स्टूडेंट्स शामिल हुए थे। इस बार परीक्षार्थियों की संख्या बढने की संभावना है।
शेखर झा
इंजीनियरिंग क्षेत्र में करियर बनाने वाले स्टूडेंट्स के लिए एक बार फिर से सुनहरा अवसर है। सीबीएसई की ओर से २९ अप्रैल को ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम(एआईईईई) आयोजित होने वाली है। जिसमें लाखों की तादात में स्टूडेंट्स हिस्सा लेंगे। एग्जाम की डेट जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे स्टूडेंट्स अपने पढ़ाई को फाइनल टच देने में जुट गए हैं। एग्जाम को दो भागों में लिया जाएगा, जिसमे पहले ऑफलाइन और फिर ऑनलाइन एग्जाम आयोजित होंगे। ट्विनसिटी से भी हजारों की संख्या में स्टूडेंट्स एग्जाम फेश करेंगे। वहीं २०११ में छत्तीसगढ़ से २४ हजार स्टूडेंट्स ने एग्जाम दिया था। इस बार के एग्जाम में स्टूडेंट्स की संख्या और बढ़ सकती हैं। हालांकि देखा जाए, तो एआईईईई से पहले स्कूलों में १२वीं का एग्जाम होगा। उसके बाद ही जाकर स्टूडेंट्स इस एग्जाम में शामिल हो सकेंगे। जहां स्टूडेंट्स अपने स्कूल की परीक्षा की तैयारी कर रहें हैं, लेकिन उसके साथ ही साथ इंजीनियरिंग क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए एंट्रेंस एग्जाम की भी तैयारी कर रहे हैं। इस एग्जाम में स्टूडेंट्स को सही उत्तर देने पर नम्बर तो मिलता ही हैं, लेकिन गलत उत्तर देने पर नम्बर काट लिए जाते हैं। इसलिए स्टूडेंट्स को काफी सावधानी से प्रश्रों को सॉलव करना होता है। मार्च के फस्र्ट विक से एग्जाम के लिए शहर में कई कोचिंग में क्रैश कोर्स शुरू हो जाती है, उसमें स्टूडेंट्स को एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी कराई जाती हैं।
पहले ऑफलाइन फिर ऑनलाइन
एआईईईई के लिए सबसे पहले ऑफलाइन और उसके बाद ऑनलाइन परीक्षाएं होगी।ऑफलाइन २९ अप्रैल को और ऑनलाइन ७ मई से २६ मई तक आयोजित की जाएगी। एग्जाम के परिणाम १५ जून तक घोषित कर दिए जाएंगे। उसके बाद स्टूडेंट्स अपने-अपने रैंक के अनुसार देश के किसी भी इंजीनियरिंग कॉलज में एडमिशन ले सकेंगे।
नेगेटिव मार्किंग से सावधान
इस एग्जाम में गलत उत्तर दिए जाने पर नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान है। गलत उत्तर दिए जाने पर एक चौथाई अंक काट लिए जो हैं। इसलिए स्टूडेंट्स को उत्तर देते समय विशेष सावधानी रखनी पड़ती हैं। जिन प्रश्नों को लेकर उन्हें सस्पेंस की स्थिति रहती है, उन्हें छोड़ कर दूसरे प्रश्न बनाने चाहिए। हो सकता है कि बाद में समय मिलने पर उन प्रश्नों पर फिर से एक नजर डाल सकें। वहीं ऑनलाइन में स्टूडेंट्स को एक सेक्शन से दूसरे सेक्शन में जाने की छूट होती है और वे किसी भी प्रश्न पर आसानी से टिक लगा सकते हैं। एक बार सबमिट का बटन दब जाने के बाद दोबारा उसमें परिवर्तन नहीं किया जा सकता हैं।
शॉर्टकट्स आवश्यक
किसी भी फॉर्मूले पर अपना खुद के शॉटकट तैयार करने चाहिए। यह कार्य तैयारी के शुरुआती चरण में ही किया जाए, तो फायदेमंद साबित हो सकता है। शॉटकट से स्टूडेंट्स प्रश्नों का जवाब जल्दी एवं सही तरीके से दे पाते है। वैसे भी एग्जाम में प्रश्नों को हल करने के लिए कोई विशेष समय नहीं दिया जाता है, लेकिन अपना शॉटकट यूज करते हैं, तो कम समय में अधिक प्रश्नों को हल किए जा सकते हैं।
वर्जन
करना होगा रिवीजन
जो स्टूडेंट्स इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं और एग्जाम देना चाहते हैं, तो उसको १२वीं और एआईईईई को ध्यान में रखकर तैयारी करनी चाहिए। क्योंकि १२वीं एग्जाम के कुछ दिनों बाद एआईईईई के एग्जाम आयोजित होंगे। स्टूडेंट्स ने जितनी तैयारी अभी कर ली है, उसका ही रिवीजन करना चाहिए। स्टूडेंट्स को अब किसी भी तरह का नया कुछ नहीं करना चाहिए, क्योंकि अब उनके पास ज्यादा समय नहीं रह गया है।
- आरके रेड्डी, शिक्षाविद्
कंफर्म के बाद करें टिक
स्टूडेंट्स को १२वीं फाइनल एग्जाम को देखते हुए तैयारी करनी चाहिए। क्योंकि अगर स्टूडेंट्स १२वीं एग्जाम की तैयारी करते हैं, तो उसका फायदा उनको एआईईईई में मिलेगा। जब तक स्टूडेंट्स किसी प्रश्न के उत्तर पर कंफर्म नहीं रहते हैं, तो उनको टिक नहीं करना चाहिए। एग्जाम की तैयारी स्टूडेंट्स को टेस्ट के माध्यम से करनी चाहिए, टेस्ट देने से स्टूडेंट्स को अपनी गलती का पता चलता हैं।
- मोहम्मद सलीम, शिक्षाविद्
ध्यान रखें
० १२वीं और एआईईईई को ध्यान में रखकर तैयारी करना चाहिए
० रिवीजन जरूर करना चाहिए।
० प्रश्न को अपने शॉटकट तरीके से सॉलव करना चाहिए।
० प्रश्न को समझकर हल करना चाहिए।
० जिस प्रश्र को लेकर कंफ्यूड हो, उसको सॉलव नहीं करना चाहिए।
० टेस्ट के माध्यम से करें तैयारी