गुरुवार, 20 जनवरी 2011

हर धर्म की माता गाय

गाय हमारी माता है, जन जन से उसका नाता हैं।
किसी जाति नहीं, धर्म नहीं हर कौम से उसका रिश्ता हैं।
गाय ने हम सबको वह पिटारा दिया हैँं।
जो क•ाी नहीं खाली होता उससे मानव जीवन संवरता हैं।
इतना ही नही श्रम के साथी बैलों को •ाी यही जन्म दिया हैं।
अमीर-गरीब रुपी रथ बैलों से सारा जग खुशहाल किया है।
इतनी सारी उपकारिता होते गाय फिर क्यों काटा जाता है।
इसे केवल पशु न समझो गाय ने मानव जीनव को नव रुप प्रदान किया है।
हिन्दु-मुस्लिम सिक्ख ईसाई स•ाी आगे बढकर आओ रे •ााई।
घर-घर जाकर अखल जगाकर गौ की रक्षा करो रे •ााई।
अब मानसिकता बदलकर गाय नहीं कटने देंगे रे •ााई।
•ाारतीय संस्कृति के गौरव को क•ाी चटकने नहीं देंगे रे •ााई।
माँ •ाारती के चरणों को नमन करो हमें शाक्ति देगी रे •ााई।
गो वंश, गो संवर्धन कर बसुधा की लाज रखेंगे रे •ााई।
रचियता
गोवर्धन पाणिग्राही

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