गुरुवार, 19 जनवरी 2012

वेबसाइट से फैकल्टी संबंधी आर्डनेंस गायब

सीएसवीटीयू में चयन समिति बनाने में गड़बड़ी, एआईसीटीई के मापदंडों का नहीं होता पालन, इंजीनियरिंग कॉलेज संचालक करते हैं मनमानी
नारद योगी
प्रदेश में स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय(सीएसवीटीयू) की स्थापना इंजीनियरिंग शिक्षा के विकास के लिए की गई थी। पिछले कुछ वर्षों में यूनिवर्सिटी में जिस तरह के फर्जीवाड़े और अनियमितताएं हुई हैं, उससे तकनीकी शिक्षा का विकास कम व्यवसायीकरण ज्यादा हुआ है। कॉलेज संचालकों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए यूनिवर्सिटी ने संबद्धता, प्रवेश में फर्जीवाड़ा के अलावा फैकल्टी चयन में भी कोई पारदर्शिता नहीं बरती। इसका सबूत है सीएसवीटीयू की वेबसाइट से फैकल्टी चयन के लिए बनी आर्डिनेंस-१९ का गायब होना। यूनिवर्सिटी के अधिकारियों के मुताबिक फैकल्टी की नियुक्ति आर्डिनेंस-१९ में निर्धारित नियमों के अनुसार गठित चयन समिति के माध्यम से की जाती है, लेकिन वेबसाइट में आर्डिनेंस-१९ में चयन समिति की जगह एमबीए पाठ्यक्रम में प्रवेश संबंधी जानकारी दी गई है। इससे अधिकारियों के बयान की सच्चाई का पता चलता है। यूनिवर्सिटी से संबंधित २२ आर्डिनेंस वेबसाइट पर हैं। इनमें से फैकल्टी चयन संबंधी प्रक्रिया का एक भी नहीं है। इससे साफ है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन फैकल्टी नियुक्ति प्रक्रिया के बारे में बताना नहीं चाहता। सूत्रों के मुताबिक यूनिवर्सिटी की स्थापना से लेकर अब तक फैकल्टी चयन में कॉलेज संचालकों को पूरी छूट दी गई। और अखिल भारतीय तकनीकी परिषद(एआईसीटीई) के नियम के विपरीत फैकल्टी चयन किया गया। यही वजह है कि फैकल्टी चयन संबंधी आर्डिनेंस को वेबसाइट डाला नहीं गया है।
क्या है आर्डिनेंस-१९
विश्वविद्यालय अधिनियम १९७३ के अनुसार देश भर में विश्वविद्यालय स्थापित किए जाते हैं। इन्हें संचालित करने के लिए संबंधित राज्य शासन विवि अधिनियम १९७३ का पालन करते हुए अध्यादेश जारी करती है। इन्हीं से विश्वविद्यालाय संचालित होते हैं। सीएसवीटीयू के लिए भी छगविवि अधिनियम बनाया गया है। इसके तहत अनेक आर्डिनेंस बनाए गए हैं। इनमें से आर्डिनेंस-१९ सीएसवीटीयू से संबद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजों में फैकल्टी की नियुक्ति करने के लिए चयन समिति बनाने के बारे में बताता है। समिति का गठन व फैकल्टी के चयन में आर्डिनेंस में दिए दिशा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक होता है।
सीएसवीटीयू के २२ आर्डिनेंस
यूनिवर्सिटी के कामकाज के लिए २२ आर्डिनेंस बनाए गए हैं। आर्डिनेंस नंबर -१ में इंजीनियरिंग कॉलेजों को संबद्धता देने, २ में छात्रों के कॉलेजों में प्रवेश, यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट, छात्रों के ट्रांसफर प्रक्रिया आदि, ३ में विभिन्न फैकल्टी डिपार्टमेंट, ४ में छात्रों का नामांकन, ५ में परीक्षा आयोजन, ६ में परीक्षा संबंधी, ७ में फैलोशिप व स्कालरशिप, ८ में परीक्षा फीस, ९ मेें परीक्षकों को टीए व डीए संबंधी, १० में पीएचडी, ११ में रिसर्च के द्वारा आर्किटेक्चर में मास्टर डिग्री, १२ में एमई व एमटेक के बारे में, १३ में फुल टाइम एमसीए कोर्स, १४ में बीई में पीजी, १५ में पांच वर्षीय बीआर्क, १६ में बी फार्मा, १७ त्रिवर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम, १८ में फार्मेसी में दो वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम, १९ में एमबीए पाठ्यक्रम, २० में पार्ट टाइम बीई पाठ्यक्रम, २१ में पार्ट टाइम इंजीनियरिंग में डिप्लोमा और २२ में एप्लाइड जियोलॉजी में मास्टर डिग्री संबंधी जानकारी हैं।
चयन समिति के सदस्य
यूनिवर्सिटी की फैकल्टी चयन समिति में कुलपति या उनका प्रतिनिधि, दो विषय विशेषज्ञ और संबंधित इंजीनियरिंग कॉलेजों के सोसाइटी अध्यक्ष शामिल होते हैं। सूत्रों के मुताबिक ऐसे कई मामले हैं, जिनमें जिस विषय की फैकल्टी के चयन के लिए साक्षात्कार कार्यक्रम आयोजित किया जाता था, उस चयन समिति में संबंधित विषय के विशेषज्ञ शामिल नहीं होते थे। सिविल वालों के चयन समिति में मैकेनिकल वाले और मैकेनिकल वालों के लिए बनी चयन समिति में इलेक्ट्रीकल के विशेषज्ञ शामिल होते थे।
वर्सन
फैकल्टी चयन में पूरी पारदर्शिता बरती जाती है। नियुक्तियां पहले की हैं। वर्तमान में एआईसीटीई के नियमों के अनुसार चयन किया जाएगा। आर्डिनेंस की जांच की जाएगी।
-डॉ अशोक कुमार दुबे, रजिस्ट्रार, सीएसवीटीयू, भिलाई

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