शुक्रवार, 20 जनवरी 2012

परदेस में हैं मेरे भईया

पूजा पटेल
राखी रेशम की डोर से बंधा एक पवित्र रिश्ता है। इस रिश्ते में अटूट प्यार छुपा है। राखी के अटूट बंधन को लेकर सदियों से कई गाथाएं चली आई हैं। द्रौपदी ने अपनी रक्षा के लिए भगवान कृष्ण को राखी बांधी थी और सदियों से ये रक्षा सूत्र वीर योद्धाओं की कलाई पर बंधता आया है और बंधता रहेगा चाहे भाई पास हो या दूर। भाई कि कलाई में बंधने वाला धागा बहुत अहम होता है, जहां बहन भाई की रक्षा के लिए यह रक्षा सूत्र बांधती है वहीं भाई भी बहन की रक्षा का वचन देता है। जब भाई किसी वजह से घर से दूर चला जाता है और राखी पर घर नहीं आ पाता है, तो बहन अपने अरमानों को रेशम की डोरी से सजाकर प्यार का अटूट बंधन भेज देती है बंद लिफाफे में।
बचपन के छोटे-मोटे झगड़े और पल में मिल जाना एक दूसरे से रुठना-मनाना सब कुछ दूर भले है पर सभी को यादों और तस्वीरों में समेटकर रखा हुआ है। बहन का मन तो करता है कि कोई जादू की छड़ी होती तो उस पल को वापस ले आती। इन यादों को याद कर कभी-कभी आंखों में आंसू भी आ जाते हैं पर भाई की बढ़ती प्रगतियों को देखकर अरमानों को मन के अंदर ही दबा लेती हैं, जब वह भाई को राखी के साथ पत्र भेजती हैं तो लिख देती हैं यहां सब कुशल है पर सच तो कुछ और ही होता है। और राखी भेजते समय बस यही सोचती हैं कि क्या हुआ जो राखी मेरे हाथ से न बंध पाई पर इस राखी में मेरी दुआएं और प्यार छुपा है, जिसे भले ही भाई तुम खुद अपने हाथों से बांधो पर ये राखी जब तक बंधी रहेगी मेरी दुआओं और प्यार का एहसास दिलाती रहेगी। ट्विनसिटी में भी ऐसी कई बहन हैं जो कई वर्षों से दूर देश में रह रहे अपने भाई रक्षा सूत्र भेज रही हैं।
सात संमदर पार है भाई
देशमुख परिवार बोरसी दुर्ग के सबसे छोटे बेटे श्रीकांत देशमुख पिछले १५ वर्षों से अमेरिका मे रह रहे हैं। वे ब्यूनस आयरस में इंडियन कपड़ों का बिजनेस करते हैं। इस दौरान वे सिर्फ २ राखियों पर ही अपनी बहन से मिल पाए हैं। सुमन वर्मा बताती हंै कि पिछली राखी पर तीनों भाई साथ थे। इस बार वे नहीं आ रहे हैं, इसलिए वे राखी पोस्ट कर रही हैं। सुमन भाई को याद करते हुए कहती हैं कि भाई और उनक ी बहुत लड़ाई होती थी पर प्यार भी उतना ही ज्यादा था। कभी उन्हें भईया नहीं बुलाया एक बार भईया बुलाया तो कहने लगे तू मुझे नाम से ही बुलाया कर। सुमन बताती है कि श्रीकांत भईया मेरी राखी सालभर तक बांध कर रखते हैं। ३ भाई और ३ बहनों में दोनों बड़ी बहन सोभा व सुम्मति भी अमेरिका में रहती हैं जो इंडिया में रह रहे दो भाइयों संजय व विवेक के लिए अपने हाथों से बनी राखी भेजती हैं।
बहुत मिस करती हंू
दुर्ग शंकर नगर की गीता टांक भी अपने दोनों भाईयों को राखी भेजती हैं। गीता ने अपनी पसंद की राखी अपने भाइयों को पोस्ट भी कर दी है। दोनों भाई तिपेश और देवेन्द्र इंजीनियर हैं व जॉब के चलते हैदराबाद व गुणगांव में रह रहे हैं। गीता राखी पर अपने भाइयों को बहुत मिस करती है। गीता कहती है कि छोटा भाई देवेन्द्र बहुत शरारती है हम दोनों भाई-बहन स्पेशल ओकेशन पर किचन में कुछ न कुछ बनाते थे। तिपेश भाई के साथ तांगे में मार्केट से घर आने की बहुत सी यादे हैं। जॉब के चलते दोनों भाई राखी पर नहीं आ पाते पर दिवाली में दोनों भाई ढेर सारे गिफ्टों के साथ आकर सारी कसर पूरी कर देते हैं।
जिद्दी है पर सबका लाडला भी
गौतम परिवार दुर्ग के सबसे छोटे बेटे भावेश गौतम सब इंसपेक्टर हैं, जिनकी पोस्ंिटग दंंतेवाड़ा है। ६ बहनों अदिती, ज्योति, छमा, रमा, बिंदू, गायत्री का यह सबसे छोटा भाई सबका लाडला है। दंतेवाड़ा पोस्ंिटग की वजह से पिछले दो वर्षों से राखी पर नहीं आ पाया है। इसलिए सभी बहनें अपनी पसंद की राखियां भाई को पोस्ट कर रही हैं। बहनों का कहना है कि भाई सबसे छोटा होने की वजह से थोड़ा जिद्दी है पर सबसे जिम्मेदार भी है राखी में भाई को सारा परिवार बहुत मिस करेगा। बहन ज्योति बताती हैं कि भाई को दिवारों पर अपना नाम लिखने का बहुत शौक था इसी शैतानी के चलते उसे डांट पड़ती थी उसकी ये शैतानी याद कर हम सब बहनें आज भी हंस पड़ती हैं।

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