रविवार, 8 जनवरी 2012

कैद में हैं भगवान, छुड़ाने की जमानत राशि है 45 लाख

ब्रज किशोर दुबे
देश का कोई वीर सपूत मेरा भी जमानत ले लो। कोई मुझे इस जंजीर से छुटकारा दिला दो। ये पुकार किसी मानव का नहीं यह बंधनों को काटने वाले भगवान हनुमान की हो सकती है, क्योंकि वे अपने मंदिर से निकल कर पुलिस थाने के हाजत में बंद हैं। आरा शहर से 15 किलोमीटर उत्तर कृष्णगढ़ थाना क्षेत्र के गुंडी ग्राम में स्थित करीब दो सौ वर्ष पुराना श्री रंग जी के मंदिर में अष्टधातु की 17 मूर्ती विरजमान थी। दक्षिण भारतीय शैली से निर्मित इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सूर्य की पहली किरण सीधे मंदिर में प्रवेश कर भगवान के चरणों को स्पर्श करती है। जिसे देखने के लिए देश के कोने-कोने के लोग आते रहे है।
मूर्ती की चोरी -
प्राप्त जानकारी के अनुसार सन् 1970 के दशक से इस मंदिर में भगवान की 6 बार मूर्ती चोरी हुई। लेकिन सन् 1994 में जब भगवान हनुमान और बरबर मुनीस्वामी की मूर्ती चोरी हुई तब से भगवान की मूर्ती बरामद होने के बाद आज तक भगवान कृष्णगढ़ थाने के हाजत में ही बंद है।
मंदिर निर्माण के

वंशज - करीब 200 वर्ष पूर्व मंदिर का निर्माण कराने वाले गुंडी ग्राम निवासी बाबू विष्णुदेव नारायण सिंह के पाँचवें पिढ़ी के वंशज बबन सिंह ने बताया कि 1994 से पहले मंदिर के सुरक्षा जिला प्रशासन के जिम्मे थी। लेकिन सन् 1994 में मूर्ती चोरी जाने के बाद जिलाप्रशासन ने इसकी जिम्मेवारी लेने से इंकार कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट के द्वारा जारी आदेश में भगवान की कीमती मूर्ती के जमानत लेने के एवज में 45 लाख रूपये का बांड भरना था
। वहीं उन्होंने बताया कि पैसे और सुरक्षा के अभाव में मई 2010 को मंदिर बाबा भगवान राम ट्रस्ट को दान दे दिया। वहीं ट्रस्ट के प्रबंधक बिजेन्द्र सिंह ने बताया कि प्रशासन यदि सुरक्षा की जिम्मेवारी ले तो ट्रस्ट जमानत करा लेगा।
प्रशासन की दलिल - जिला प्रशासन की ओर से ग्रामीण डीएसपी रविश कुमार ने बताया कि जिले में हर मंदिर के लिए अलग से पुलिस जवान देना संभव नहीं है । वहीं उन्होंने कहा कि ग्रामीण लोग एक कमेटी बनाकर भगवान की सुरक्षा की जिम्मेवारी ले तो प्रशासन की ओर से भरपूर सहयोग किया जायेगा।
जमानत में 45 लाख रूपये देने को तैयार है हनुमान मंदिर - इन सब विवादों के बीच धार्मिक न्यास परिसद के अध्यक्ष किशोर कुणाल ने कहा कि हनुमान मंदिर भगवान की जमानत लेने के लिए 45 लाख रूपये भरने की कोर्ट में अर्जी दे चुका है। लेकिन यह तब संभव है जब मंदिर के ट्रस्टी इसके लिए तैयार हो जाय। वहीं उन्होंने कहा कि मैने राज्य सरकार को इस बारे में कई बार पत्र लिख चुका हूं कि मंदिरों की सुरक्षा के बारे में जल्द कोई ठोस पहल नहीं कि गई तो आने वाले समय में एक भी अष्टधातु की मूर्ती नहीं बचेगी।
आम जनता का रोष - मंदिर में भगवान को नहीं होने से आस-पास के ग्रामीणों में काफी रोष है । 70 वर्षीय ग्रामीण शिवाधार सिंह ने बताय कि हाथ में फुल का डलिया लिए सभी इस आशा में प्रतिदिन मंदिर आते है कि किसी दिन कोई ना कोई मेरे आराध्य भगवान का जमानत जरूर ले लेगा । देखिये वो सौभाग्य इस जीवन में देखने को मिलता है या नहीं ..

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