सोमवार, 9 जनवरी 2012

सामली गाँव से मॉडलिंग रैम्प तक

राजेश जोशी
सफ़ेद सेक्सी लिबास में ख़ूबसूरत, लंबी और छरहरी वो लड़की एक उतनी ही आलीशान कार के पास खड़ी थी. आत्मविश्वास से भरी मुस्कान बिखेरते हुए वो कार देखने आ रहे लोगों का स्वागत कर रही थी. उसमें और वहाँ मौजूद दूसरी मौजूद लड़कियों में बहुत फ़कऱ् नहीं था, सिफर् इस बात के कि ये लड़की उत्तर प्रदेश में मुजफ़्फ़ऱनगर क़स्बे के पास सामली गाँव की रहने वाली है. मीनाक्षी बालियान ने गाँव में ही रहकर पढ़ाई की और वहीं से मॉडलिंग की दुनिया में प्रवेश किया. वो बताती हैं कि उनके पिता किसान हैं और अब भी खेती करते हैं और उन्हें मीनाक्षी के मॉडलिंग करने पर कोई ऐतराज़ नहीं है. दिल्ली के कार मेले में महँगी देसी-विदेशी कारों के साथ-साथ मीनाक्षी जैसी कई ख़ूबसूरत भारतीय और विदेशी मॉड़ल लड़कियाँ भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. आत्मविश्वास से भरी, फर्ऱाटेदार अँग्रेज़ी बोलने वाली इन मॉडलों में भारत के अलावा रूस, ऑस्ट्रेलिया और कई दूसरे देशों की लड़कियाँ भी हैं. फिर भी लंबी, छरहरी मीनाक्षी में कुछ ऐसा था कि मैं बेसाख़्ता उनके पास चला गया और अँग्रेज़ी में पूछा - आप कितनी देर से यहाँ खड़ी हैं? मीनाक्षी कहती हैं कि मॉडलिंग के करियर में वो कोई भी तरीक़ा अपना कर आगे नहीं बढऩा चाहतीं. पहले कुछ देर ख़ामोश रहने के बाद उसने मुस्कुरा कर हिंदी में जवाब दिया -- एक घंटा. जब चारों ओर करोड़ों की आलीशान कारों की नुमाइश लगी हो, जिन्हें देखने
के लिए रतन टाटा जैसे उद्योगपति, इरफ़ान पठान जैसे क्रिकेट खिलाड़ी और कटरीना कैफ़ जैसी स्टार पहुँची हुई हों तो एक ग्लैमरस मॉडल से अँग्रेज़ी में पूछे गए सवाल का जवाब हिंदी में सुनना आपको अचकचा देता है.
मेरी दिलचस्पी बढ़ी तो मैंने बातचीत भी आगे बढ़ाई. प्रस्तुत हैं इस बातचीत के कुछ अंश:


आप कब से मॉडलिंग में हैं?

डेढ़ साल.

आप दिल्ली की रहने वाली हैं?

नहीं. मैं उत्तर प्रदेश में मुजफ़्फ़ऱनगर की रहने वाली हूँ.

तो मुजफ़्फ़ऱनगर ख़ास में रहती हैं या कहीं आसपास?

मैं सामली गाँव की हूँ.

वहीं के तो किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत भी थे?

वो सिसौली है. सामली के पास ही है. सामली, सिसौली.. भौरा.. ये सब आस-पास ही हैं
मॉडलिंग में आपको कितना संघर्ष करना पड़ा?
मुझे ज़्यादा स्ट्रगल नहीं करना पड़ा. जब मैं मुजफ़्फ़ऱनगर में रहती थी तभी से मेरे पास ऑफऱ आने शुरू हो गए थे. मॉडलिंग की दुनिया तो बहुत चकाचौंध से भरी है. दिखावा बहुत है. अँग्रेजिय़त भरी हुई है. आप कभी ख़ुद को मिसफि़ट नहीं पातीं? नहीं, नहीं, नहीं. जब मैंने शुरुआत की थी तो मुझे लगा था कि यहाँ पर (मॉडलिंग की दुनिया में) सभी लोग अँग्रेज़ी बोलते हैं, हिंदी कम चलती है. लेकिन जब मैं मीटिंगों में जाती थी तो इस कॉनफिड़ेंस के साथ जाती थी कि मुझे पता है कि मॉडलिंग क्या होता है -- रैम्प पर चलना, फ़ोटो शूट करना, पोज़ करना.... तो जो मॉडल्स इंग्लिश बोलती थीं, मैं उनसे आगे होती थी. मैं दिखाती थी कि मैं हिंदुस्तानी हूँ. मुझे हमेशा लगता है कि मैं सुंदर हूँ और मुझमें वो सब कुछ है जो एक अँग्रेज़ी बोलने वाली लड़की में नहीं है.
आपने पढ़ाई कहाँ से की?
"अच्छी भी लड़की होगी तो उसके बारे में पड़ोसी गंदा ही बोलेंगे कि बाहर क्यों भेज रहे हो, मॉडलिंग क्यों करवा रहे हो, मॉडलिंग अच्छी नहीं होती है.... मेरे मम्मी पापा तो बस हमेशा ही बोलते हैं कि हम तो चाहते हैं कि तू कामयाब हो. बस तेरे बारे में कुछ (ग़लत) सुनने को न मिले." वहीं मुजफ़्फ़ऱनगर से. मेरे पापा किसान हैं. उनको मेरे बारे में सब पता है कि मैं मॉडलिंग करती हूँ. अगर वो यहाँ आ भी जाएँ तो भी कोई बात नहीं. जैसे लड़कियाँ घर वालों से छिपाकर मॉडलिंग करती हैं, मेरे साथ ऐसा नहीं है. मुझे पूरी छूट है. मेरे पापा कहते हैं बेटा, इज़्ज़त से रहना. तेरी लाइफ़ है इन्ज्वॉय करो. पर कभी ऐसा न हो कि लोग कहें कि छोटे से गाँव से लड़की आई है और उसने ग़लत काम किया ताकि हमारी इज़्ज़त पर आँच आए.
काफ़ी समझदारी की बात है.
ये मुझे मेरे मम्मी पापा से मिला. पड़ोस तो आप जानते ही हैं कैसा होता है. अच्छी भी लड़की होगी तो उसके बारे में पड़ोसी गंदा ही बोलेंगे कि बाहर क्यों भेज रहे हो, मॉडलिंग क्यों करवा रहे हो, मॉडलिंग अच्छी नहीं होती है.... मेरे मम्मी पापा तो बस हमेशा ही बोलते हैं कि हम तो चाहते हैं कि तू कामयाब हो. बस तेरे बारे में कुछ (ग़लत) सुनने को न मिले.
तो मॉडलिंग के करियर में आप कहाँ तक पहुँचना चाहती हैं.
मैं कोई दिमाग़ी टेंशन नहीं लेती. इन्ज्वॉय ज़्यादा करती हूँ. मेरे साथ ऐसा नहीं है कि मुझे बहुत ऊपर तक पहुँचना है... मॉडलिंग ही कर रही हूँ, यही करूँगी. लेकिन ऊपर पहुँचने के लिए कोई ग़लत काम नहीं करूँगी. मैं बहुत सारी चीज़ें कि़स्मत पर छोड़ देती हूँ.

"जब मैंने शुरुआत की थी तो मुझे लगा था कि यहाँ पर (मॉडलिंग की दुनिया में) सभी लोग अँग्रेज़ी बोलते हैं, हिंदी कम चलती है. लेकिन जब मैं मीटिंगों में जाती थी तो इस कॉनफिड़ेंस के साथ जाती थी कि मुझे पता है कि मॉडलिंग क्या होता है -- रैम्प पर चलना, फ़ोटो शूट करना, पोज़ करना.... तो जो मॉडल्स इंग्लिश बोलती थीं, मैं उनसे आगे होती थी. मैं दिखाती थी कि मैं हिंदुस्तानी हूँ."
मीनाक्षी बालियान

2 टिप्‍पणियां:

  1. ".. मेरे मम्मी पापा तो बस हमेशा ही बोलते हैं कि हम तो चाहते हैं कि तू कामयाब हो. बस तेरे बारे में कुछ (ग़लत) सुनने को न मिले." वहीं मुजफ़्फ़ऱनगर से. मेरे पापा किसान हैं. उनको मेरे बारे में सब पता है कि मैं मॉडलिंग करती हूँ. अगर वो यहाँ आ भी जाएँ तो भी कोई बात नहीं. जैसे लड़कियाँ घर वालों से छिपाकर मॉडलिंग करती हैं, मेरे साथ ऐसा नहीं है." ye vo line hai jo inhone kaha aur sayad koi aur Kamyab mahila nahi kahti. AAP SADA IS CHHETR ME AAGE BADHEN,AAP PRAVIRTI ANUKARNIY HAI, HAMARI DUA AAPKE SAATH HAI. JAI HIND

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  2. aapko to sabse pahale bahut bahut dhnybad... kiyoki aapne sabse pahale mere blog ki or najar dala... baat jo aapne likha hai waha kabale tariph hai......

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